प्रस्तावना:- हमारे भारत देश में प्रत्येक समाज के अपने अलग-अलग त्योहार होते हैं ।और उनका महत्व भी उनके लिए बहुत ही बहुत होता है प्रत्येक व्यक्ति अपनी खुशी के लिए सब के साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं। और ये त्योहार रोज के जीवन से अलग होता है । उसे हम एक बहुत खास दिन मानते हैं । उन्ही त्योहारों में से एक है ।ईद जिसे सभी मुसलमान भाई मिलकर मनाते हैं इसे ईद उल फितर के नाम से भी जाना जाता है और ईद-उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है.।सामान्य भाषा मे मीठी ईद ओर बकरा ईद ।इस प्रकार ईद का अपना एक महत्व है।

ईद की शुरुआत हुई:- ईद या ईद उल- 624 ईसवी से मनाया जाता रहा है ।पैगंबर हजरत मोहम्मद ने बद्र के युद्ध में विजय प्राप्त की थी ।यह त्योहार उसी खुशी में मनाया जाता है।

ईद का अर्थ:– ईद का अर्थ होता है ।जश्न मनाना, या त्योहार मनाना।

ईद कितने प्रकार की होती है

ईद दो प्रकार की होती हैं।

(1) मीठी ईद

(2)बकरा ईद

मीठी ईद:- मीठी ईद में मीठे पकवान बनाए जाते हैं ।जिसमें सिवइयां इत्यादि होते है। अपने से छोटों को ईदी देने की भी परंपरा है ।दान देकर अल्लाह को याद किया जाता है।इस दान को इस्लाम में फितरा कहा जाता है ।इसलिए ईद को ईद – उल – फितर कहा जाता है ।इसमें सभी आपस में गले मिलकर एक दूसरे को ईद की शुभकामनाएं देते हैं ।

और अल्लाह से सुख और शांति ओर बरकत के लिए दुआ मांगते है। मीठी ईद में 29 व 30 वे रमजान के इफ्तार के लगभग 5 से 6 मिनटो के लिए चांद निकलता है ।अगर मौसम साफ रहा तो आसानी से चांद को देखा जा सकता है ।इस्लाम में अपनी आंखों से चांद को देखना अच्छा माना जाता है।

बकरीद ईद:- बकरीद ईद को ईद -उल – अजहा के नाम से जाना जाता है । मीठी ईद जहां मिठास भरी होती है ।वही बकरी ईद मीठी ईद के 2 महीने बाद मनाई जाती है ।मुस्लिम समाज में मीठी ईद के बाद दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है । बकरा ईद के दिन सबसे पहले नमाज अदा की जाती है। उसके बाद बकरे या अन्य जानवर की कुर्बानी दी जाती है ।कुर्बानी के बकरे के तीन हिस्से किये जाते है। इसका एक हिस्सा गरीबों को, दूसरे दोस्त अहबाब के लिए , ओर तीसरा हिस्सा घर मे इस्तमाल
किया जाता है।

बकरीद को मनाने की कहानी:- मान्यता है कि एक पैगंबर हजरत इब्राहिम के 90 साल की उम्र तक कोई औलाद नहीं थी ।उन्होंने खुदा से बहुत इबादत की तब जाकर उनका इस्माइल नाम के बेटे ने जन्म दिया ।वह बहुत खुश हुए फिर दिन उन्हें एक सपना आया है जिसमें कुर्बानी की बात कही गई तो उन्होंने ऊंट की कुर्बानी दे दी।पर उन्हें फिर एक सपना आया और उसमें सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने की बात कही गई तो इब्राहिम ने सारे जानवरों की कुर्बानी देदी।

उन्हें फिर वापिस सपना आया इस बार उन्होंने खुदा का आदेश मानते हुए अपने बेटे की कुर्बानी के बारे में सोचा और उन्होंने अपनी पत्नी को बच्चे को नहला कर तैयार करने को कहा बेटे को लेकर जब हजरत इब्राहीम बलि वाले स्थान पर जाने लगे तब उन्हें शैतान ने कुर्बानी देने से मना किया।जब ये बात शैतान बार- बार कहने लगा तो इब्राहिम ने अपनी आँखों पर पट्टी बांधकर बलि देने का फैसला लिया ओर बलि देदी लेकिन जब पट्टी खोलकर देखा तो बच्चा तो खेलकूद रहा और अल्लाह ने बच्चे की जगह बकरे को बदल दिया था ।

इस प्रकार बली का प्रचलन शुरू हुआ ।वह हमेशा बुराई के खिलाफ लड़े और उनका ज्यादातर जीवन जन सेवा में ही बीता इस प्रकार व जन सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।

ईद कब मनाई जाती है:– ईद का त्योहार इस्लामी माह शकवाल की पहली तारीख को मनाया जाता है ।जिसे मुसलमान लोग बहुत ही पवित्र महीना मानते हैं इस माह में रोजे (उपवास )रखे जाते हैं सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते हैं सूर्यास्त के पश्चात रोजा खोला जाता है ।जिसे रोजा इफ्तारी कहा जाता है ।दिनभर कुरान शरीफ का पाठ करा जाता है रोजे रखने वाले व्यक्ति के द्वारा और नियम अनुसार नमाज अदा की जाती है पूरे महीना रोजा चलता है और व्यक्ति सच्चे मन और पूरे उत्साह से रोजा रखता है और उसका पालन करता है।

उपसंहार

मीठी ईद मिठास लाएं.
बकरीद ईद खुशियां लाएं
ना हो भेदभाव ना कोई हो लड़ाई.
इस प्यारी सी सौगात को मिलकर हम सब चलो मनाए.

इस प्रकार ईद में रमजान के महीने में लोगों द्वारा रखे हुए रोजे से उनके मन मे विश्वास उत्पन्न होता है कि रोज़े से उनकी आत्मा पवित्र होती है ।और उन्हें बुरे कर्मों और नर्क से मुक्ति मिलती है ।यह त्योहार भेदभाव को भुलाकर मिलजुल कर मनाने की प्रेरणा देता है ।ईद में हम सभी को राग द्वेष भुलाकर भाईचारे की भावना रखते हुए मनाना चाहिए ।क्योंकि त्योहार स्फूर्ति ओर ताजगी और खुशियों के साथ मनाने की प्रबल शक्ति देता है।ईस में जात पात की भावना को मिटाने की प्रेरणा देता है ।

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