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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध

कृष्ण जन्माष्टमी पर निबंध 
[Essay On Krishna Janmashtami]

प्रस्तावना:- आप सभी को पता ही है , की जन्माष्टमी हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है और इसे हमारे भारत देश के अलावा अब, विदेशों में भी बडे धूमधाम से मनाया जाता है। श्री कृष्ण हमारी धरती पर मानव रूप में ही प्रकट हुए थे। जिन्हने कंश जैसे पापी का सर्वनाश कर दिया था। जब कंश का वध हुआ। तब पूरे मथुरा में हाहाकार मच गया था। कृष्णजन्माष्टमी बड़े उल्लास और हर्ष के साथ मनाने वाला त्योहार है। जिन्हें बच्चों से लेकर बड़े सभी बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाते है। माना जाता है कि  भगवान श्रीकृष्ण ने विष्णु जी और राम जी के आठवें अवतार के रूप में जन्म लिया था। कृष्ण जी का मुंह पे नाम आते है। उनकी छवि एक नटखट ओर शरारती बच्चें की बन जाती है। परंतु कृष्ण जी की शरारते ओर लीलाएं एक आम बच्चों से हट कर थी। क्योंकि जब भी ईशवर ने मानव रूप में इस धरती पर जन्म लिया वो किसी विशेष मकसद से ही लिया है। वेसे ही श्री कृष्ण जन्म भी था।

भगवान कृष्ण जी का जन्म कब हुआ:- जब कंश का पाप और धरती पर अत्याचार अत्यधिक बड़ गया तब उसका सर्वनाश करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने भगवान विष्णु जी के आठवे अवतार के रूप में धरती पर जन्म लिया था। 8 वे मनु वैवस्तव के मन्वंतर के 28 वे द्वापर में भाद्रपद के कृष्णपक्ष की रात के 7 बजे जब मूहर्त निकल गए और 8 वा मूहर्त शुरू हुआ तब आधी रात को सबसे शुभ मुहूर्त में देवकी जी के  गर्भ से श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ था। शुभ ग्रहों की दृष्टि और रोहणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि में जयंती नामक योग से 3112 ईसा पूर्व श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ था और ये समय 12 बजे ज्योतिषी अनुसार उस समय शून्यकाल था। और माना जाता है कि आज तक धरती पर इस मूहर्त में किसी मानव ने जन्म नही लिया है ओर ना ही श्री कृष्ण जी के अलावा कोई लेगा।

श्रीकृष्ण जी का पालन पोषण:- जब कंस के कारागार में श्रीकृष्ण जी रोहणी नक्षत्र में जन्म लिया तब भगवान विष्णु जी ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्रीकृष्ण को गोकुल में माता यशोदा ओर नंदबाबा के पास पहुँचा दे और उनकी संतान जो कि एक पुत्री थी। उसने भी अभी ही जन्म लिया है। उसे अपने साथ ले आये ताकी कंस को ये वहम बना रहे कि देवकी ने आठवे बच्चे के जन्म के रूप में एक पुत्र नही बल्कि एक कन्या को जन्म दिया है जिसको कंस मारना चाहता था। क्योंकि कंस को भविष्यवाणी करके कहा गया था कि देवकी के गर्भ से जो आठवे अवतार में जिस बच्चें का जन्म होगा वहीँ उसकी मृत्यु का कारण होगा और इसी वजह से श्रीकृष्ण का पालन पोषण गोकुल में मैया यशोदा ने बड़े प्यार दुलार से किया था ।

भगवान श्रीकृष्ण जी के नाम:- भगवान श्री कृष्ण जी ने महाभारत के युद्ध में अहम भूमिका निभाई है। “श्री मद्भागवत गीता ” का उपदेश प्रदान किया है। अपने जीवन मे शुख और खुशियां प्राप्त करने के लिए हम मनुष्य भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम जो कि उनकी बाल्यावस्था से शुरू होते है। श्रीकृष्ण जी के कुछ नाम इस प्रकार है। जैसे:-मुरलीधर, विष्णु, मोहन, नारायण, निरंजन, कान्हा, इस प्रकार 108 नाम है और प्रत्येक नाम का कोई ना कोई अर्थ है।

जन्म अष्ठमी की तैयारी:- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों को विशेष तौर से सजाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का विधान है। इस दिन मन्दिरों में श्रीकृष्ण जी की सुंदर-सुंदर झाकिया बनाई जाती है। श्रीकृष्ण जी को झूले पर विठाया जाता है। उन्हें झूला दिया जाता है। कहि कहि रासलीला का आयोजन किया जाता है। रात ठीक 12 बजे श्रीकृष्ण जी की आरती की जाती है और प्रसाद बाटा जाता है।

जन्माष्ठमी दही हांडी उत्सव:- बचपन से ही श्रीकृष्ण जी को मक्खन और दही बहुत पसंद था। इसी बजह से वो अपने दोस्तों की टोली बनाकर घर- घर जाकर सबके मक्खन चुरा लेते थे। उनकी इस शरारत से बचने के लिए सभी अपने मक्ख़न को उची जगह पर लटका देते थे। पर श्रीकृष्ण मटकी फोड़कर माखन चुरा लेते थे और उनकी यही शरारत आज तक दहीहंडी उत्सव मनाने की परंपरा की शुरुआत की।

उपसंहार:- इस प्रकार श्रीकृष्ण जन्म जन्माष्टमी बहुत ही धूम धाम ओर हर्षोउल्लास से मनाने वाला त्योहार है। हमे भागवत गीता में दिए गए श्रीकृष्ण के उपदेशो का पालन करना चाहिए और इन्हें अपनाना चाहिए। मान्यता भी है कि जब-जब धरती पर पाप और अत्याचार जन्म लेगा तब-तब कोई बड़ी शक्ति का भी जन्म जरूर होंगा इसलिए हम मनुष्य को इस बात का ध्यान रखते हुए सत्कर्म ओर सच्चाई की राह में चलना चाहिए और किसी भी तरह के पापो से बचना चाहिए।

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