कोरोना काल में शिक्षा और छात्रों पर निबंध-लेखन

कोरोना काल में शिक्षा और छात्रों पर निबंध

कोरोना वायरस आज संपूर्ण विश्व पर काल की भांति मंडरा रहा है। इस वायरस ने दुनिया के तमाम देशों की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था, शैक्षिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। इस वायरस से विश्व में अब तक 7.91 लाख से अधिक लोगों की मौत का दावा किया जा चुका है। हालांकि कई देश कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने में प्रयासरत है। मास्क का प्रयोग करना तथा वैक्सीन की व्यवस्था का कार्य भी शुरू किया जा चुका है। परंतु कोरोना वायरस के कारण शिक्षा के क्षेत्र में जो प्रभाव पड़ा है, वह अत्यंत चिंताजनक है। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक विद्यार्थी के लिए यह समय बेहद नाजुक है।

कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था-

कोरोना वायरस के कारण प्रत्येक व्यक्ति आज स्वयं को लाचार समझ रहा है। कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार द्वारा समय समय पर लॉकडॉउन की व्यवस्था की गई हैं। जिसके कारण हर क्षेत्र की प्रगति पर रोक लग गई है। इसी के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी कई परिवर्तन किए गए हैं। लॉकडाउन की व्यवस्था के चलते देश के समस्त कॉलेज, विद्यालय तथा कोचिंगों को बंद कर दिया गया। इसके बाद कई स्कूलों व विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन क्लासेज लेने का निर्णय लिया गया। ऑनलाइन ही छात्रों को महत्वपूर्ण नोट्स तथा प्रोजेक्ट्स उपलब्ध कराए जा रहे है।

विंभिन्न एजुकेशन ऐप के माध्यम से भी छात्रों को पढ़ने में सुविधा हुई है। कोरोना महामारी के कारण देश में होने वाली कई सरकारी परीक्षाओं पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही 2021-22 वर्ष की सीबीएसई तथा 24 अप्रैल से शुरू होने वाली यूपी बोर्ड से संबंधित दसवीं व बारहवी की परीक्षाओं के लिए अभी कोई निश्चित परीक्षा तिथि घोषित नहीं की गई है। कई राज्यों द्वारा दसवीं की परीक्षाओं को कैंसिल कर दिया गया है तथा बारहवीं की परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में विद्यार्थियों का उत्साह भी क्षीण होता नजर आने लगा है। सत्र 2020-21 में स्नातक की प्रथम तथा द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रमोट किया गया था ।

इस वर्ष(2020-2021) भी देश की परिस्थिति को देखते हुए शिक्षा के क्षेत्र में कोई कठोर निर्णय नहीं लिया गया। वर्तमान में ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था को विकल्प की भांति प्रयोग करके, छात्रों को पढ़ाई के प्रति जागरूक रखने के प्रयास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा ई लर्निंग प्लेटफॉर्म की भी शुरुआत की गई है, जिसमें ई- पीजी पाठशाला, दीक्षा, ई- बस्ता, शोधगंगा, नेशनल रिपॉजिट्री ऑफ ओपन एजुकेशन रिसोर्सेस के माध्यम से निसंदेह अध्ययन कार्य कर सकते है।

कोरोना काल में छात्रों पर प्रभाव –

2019 में चीन से फैलते हुए इस वायरस का प्रकोप सर्वजगत में छा गया। भारत में 2020 में पहुंच कर इस वायरस ने कई व्यक्तियों के परिवार तथा जीवन को नष्ट कर दिया। एक विद्यार्थी जिसके जीवन का मुख्य उद्देश्य विद्या प्राप्त करना है। कोरोना वायरस के कारण प्रत्येक विद्यार्थी निराशाजनक स्थिति से गुजर रहा है। जो छात्र नए सत्र में प्रवेश लेना चाहते है उन्हें पिछले सत्र के परिणाम ना मिलने के कारण प्रवेश नहीं मिल पा रहा है।

हालांकि ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली का उपयोग करके छात्रों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। लेकिन वह छात्र जो गांव देहात में बसे है। उनके द्वारा ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली का लाभ प्राप्त कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है। इसके अतिरिक्त ऐसे विद्यार्थी जो अपनी प्रतिभा दर्शाने में सक्षम होने लगे थे उन पर मानसिक तनाव बढ़ता नजर आएगा। अनेक खेल प्रतियोगताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जिन विद्यार्थियों ने अपने व्यक्तित्व को निखारने की शुरुआत की वह पुनः वहीं रुक गई।

इसके अतिरिक्त कोरोना काल में वर्चुअल एवम् ऑनलाइन शिक्षा से छात्रों को अध्ययन में स्वतंत्रता का अवसर भी प्राप्त हुआ है। इंटरनेट पर शिक्षा से संबंधित प्रत्येक विषय वस्तु के संबंध में ज्ञान अर्जित किया जा सकता है। छात्रों द्वारा अपने पाठ्यक्रम के अतिरिक्त अन्य विषयों का भी अध्ययन किया जाना संभव है। प्राइमरी स्कूलों के कम उम्र के छात्रों के लिए ऑनलाइन पढ़ पाना सरल कार्य नहीं है, इसके लिए उनके अभिभावकों को भी पूर्ण रूप से प्रयास करना पड़ रहा है।

ऐसे में कोरोना काल के समय में जब तक स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी बंद है, तब तक ऑनलाइन शिक्षा को महत्व देना अत्यंत आवश्यक है। छात्रों को शिक्षा से जुड़े रखने के लिए यह एक उचित प्रयास है, जो कि अब समस्त बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी के साथ साथ स्कूलों, कोचिंग संस्थानों में भी शुरू किया जा चुका है।

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