माँ पर हिंदी निबंध, mother’s day essay in Hindi

माँ पर हिंदी निबंध, मेर प्यारी माँ पर निबंध
[Hindi Essay On My Mother]

माँ एक ऐसा शब्द जिसके उच्चारण के साथ ही अंतर्मन में ऐसी भावना जाग्रत होती है जो करुणा, कोमलता और दया की भावना से ओत-प्रोत होती है, यही वो शब्द है जो हर शिशु जन्म लेने के पश्चात सर्वप्रथम बोलता है, माँ शब्द को परिभाषित करना अपने आप में एक बहुत जटिल कार्य है जिसकाएक छोटा सा  प्रयास मैंने किया है|एक नारी के गर्भ से जीवन का सृजन होता है जिसकी वजह से वह जननी कहलाती है|

इतिहास के पन्ने पलटे तो हम ऐसे बहुत से विद्वान एवं विचारक पाते हैं जिनको प्रसिद्धि उनकी मां की वजह से ही प्राप्त हुई थी जिनमें एक सुप्रसिद्ध नाम वीर शिवाजी महाराज का है  जिन्होंने अपनी वीरता एवं साहस से मुगलों के दांत खट्टे कर दिए यह सब संभव हो पाया उनकी माता जीजाबाई की वजह से, वह विलक्षण प्रतिभा की धनी स्त्री थी शिवाजी के बाल्यकाल से ही उन्हें भगवान राम, कृष्ण और भीम इत्यादि की कहानियां सुनाया करती थी और उन्हें यह बताती थी कि किस प्रकार इन लोगों ने बुराई का विरोध किया एवं उस पर विजय प्राप्त की|

माता ही परिवार में शिशु की पहली गुरु होती है और उसके द्वारा दी गई शिक्षा शिशु के मानस पटल पर जीवन पर्यंत एक अमिट छाप बनकर रहती है, दुनिया में हर रिश्ता आपको दोबारा मिल सकता है परंतु मां का नहीं मां परिवार की गाड़ी का वह पहिया है कि यदि वह गाड़ी से अलग हो गया तो गाड़ी का दुर्घटनाग्रस्त होना निश्चित है|

मां पूरे दिन यही प्रयत्न करती है कि अपने बच्चों की आवश्यकताओं को कैसे पूरा किया जाए और बदले में कुछ नहीं चाहती, अपने बच्चों की खुशी के लिए मां अपनी खुशियों की तिलांजलि दे देती है हर रिश्ते में स्वार्थ  कहीं ना कहीं जुड़ा होता है परंतु मां का प्यार तो पूर्णता निस्वार्थ होता है भारत में जितने भी महान विचारक, विद्वान, महापुरुष हुए हैं यदि हम उनकी जीवनी पड़े तो हमें यह ज्ञात होगा कि उनके चारित्रिक निर्माण में उनकी माताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है फिर चाहे वह एपीजे अब्दुल कलाम,स्वामी विवेकानंद, वीर शिवाजी या फिर गांधीजी ही क्यों ना हो|

मां जिस प्रकार अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है वैसा और कोई नहीं कर सकता वह रात- रात भर सोती नहीं है स्वयं गीले में सो जाएगी परंतु अपने बच्चे को सूखे में ही सुलाएगी,

कहते हैं प्रसव के समय एक महिला को इतना दर्द होता है जितना 600 हड्डियों को यदि एक साथ तोड़ा जाए पर वह सहती है क्योंकि वह मां होती है, मनुष्य एक बार जन्म लेता है परंतु मां का जन्म दो बार होता है दूसरी बार तब जब वह किसी और को जन्म देती है|

वर्तमान समय में आज जब मुझे समाचारों एवं टीवी के माध्यम से यह ज्ञात होता है कि किस प्रकार लोग अपनी मां को सड़कों व अनाथालयो में छोड़ जाते हैं तो बहुत दुख होता है, वह मूर्ख लोग इतना नहीं समझ पाते हैं कि जिसने उन्हें जन्म दिया जब वह उनकी देखभाल नहीं कर पाए तो और रिश्तो को क्या निभाएंगे एक पुरानी कहावत है जैसा बोओगे वैसा काटोगे यदि हर पुत्र पुत्री इस बात को समझ ले तो शायद फिर कोई देवी स्वरूपा मां सड़कों या अनाथालयो पर नहीं पाई जाएगी,जीवन के आरंभ होने से लेकर हमें बड़ा करने तक मां हमारा पालन-पोषण करती है तो क्या हम उसके बचे हुए जीवन में उसका पालन पोषण नहीं कर सकते यह करना हमारा कर्तव्य है, आपने वह कहावत तो सुनी होगी कि मृत्यु के बहुत रास्ते हैं पर जन्म के लिए सिर्फ मां है अतः मेरा यह विनम्र निवेदन है कि जो भी  मेरा यह लेख पड़े वह लेख पढ़ने के पश्चात सीधा अपनी मां के पास जाएं और उनके चरण छूकर यहां संकल्प ले कि वह  जीवन पर्यंत अपने मां की देखभाल जरूर करेगा|

जागृति अस्थाना- लेखक

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