जैसा खाए अन्न , वैसा बने मन निबंध

प्रस्तावना: भोजन सभी के ज़िन्दगी में महत्वपूर्ण है। भोजन का सेवन करने से हमे कार्य करने की क्षमता मिलती है। जैसा हम खाना खाते है उसका असर हमारे मन और मस्तिष्क पर पड़ता है।   भोजन को सनातन धर्म में भगवान् के समान माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक अन्न को ब्रह्म ईश्वर के रूप में माना जाता है। जैसा हम भोजन का सेवन करते है , उसका प्रभाव हमारे चरित्र पर भी पड़ता है। पहले लोग ज़्यादा शुद्ध भोजन का सेवन करते थे।  तब मिलावट नहीं होती थी , प्रदूषण ज़्यादा नहीं था। फसलों के पैदावार के लिए रासायनिक कीटनाशक दवाईयों का प्रयोग नहीं किया जाता था। इसलिए तब के जमाने  में लोग अधिक  बीमार नहीं पड़ते थे। आज भोजन इतना शुद्ध नहीं है क्यों कि खाद्य सामग्री शुद्ध नहीं मिलते है। कीटनाशकों का प्रयोग फसलों में आजकल अतिरिक्त होता है। इससे उपज और खाद्य सामग्री अशुद्ध होते है।  असुद्ध भोजन ग्रहण करने से मनुष्यो के  शारीरिक और मानसिक सेहत पर  असर पड़ता है।

मनुष्य ने अन्न को किसी तरह से प्राप्त किया , यह जानना ज़रूरी है। जो अन्न हम खाते है , वह किस प्रकार घर पर आया , किस माध्यम से आया , उसका ध्यान रखना ज़रूरी है। कुछ लोग परिश्रम करके अन्न कमाते है। कुछ लोग गलत , धोखे के राह पर चलकर कमाई करते है।  कुछ चोरी और लूटपाट करके अन्न प्राप्त करते है। अगर सही मार्ग को अपनाकर लोग अन्न लाते है तो उसका सकारात्मक प्रभाव लोगो पर पड़ता  है। कोई गलत मार्ग को अपनाकर अन्न लाते है तो निश्चित तौर पर उसका  बुरा प्रभाव पड़ता है।  ईमानदारी , सच्चाई , परिश्रम जैसे गुणों को अपनाकर लोग चैन की नींद सोते है।

शास्त्रों के अनुसार ज़रूरी मान्यताएं

शास्त्रों में लिखी बातों को लोग आज मानकर नहीं चलते है।  इसलिए समाज में रह रहे लोगो को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आज लोग शास्त्रों में लिखी गयी बातों का अनुकरण नहीं कर रहे है। आज की सदी के लोग खाना बनाने और भोजन सेवन करने के विधियों और उसूलो से बेखबर है। अगर वह शास्त्रों में लिखे उन नियमो को जानेगे नहीं तो जाहिर तौर पर उसका पालन नहीं करेंगे।

भोजन पकाने से पहले व्यक्ति की मनोस्थिति

अन्न ग्रहण करने  से  पूर्व यह जांच लेना ज़रूरी है कि भोजन को  परोसा और बनाया किसने। भोजन पकाने  वाले  इंसान  के मस्तिष्क और मन में क्या विचार है।  क्या वह  क्रोधित  था  या उसमे नाराज़गी थी  या उसने किसी के साथ गलत किया है , इन सब का असर हमारे भोजन पर पड़ता है। जो व्यक्ति खाना बना रहा है , उसके मन में जिस तरह के विचार पनपेंगे , उसका प्रभाव भोजन खाने वाले पर  पड़ेगा।

शास्त्रों में लिखी ज़रूरी बातें जिनका लोग आज नहीं करते अनुकरण

बहुत सारे लोग शास्त्रों में विश्वास करते है और वह सबसे पहले भगवान् की पूजा करते है।  भगवान् को  भोजन अर्पित करके वह अपना खाना खाते है। ब्राह्मणो का भोजन साधारण लोगो को नहीं खाना चाहिए। हमे भोजन बिना नहाये  नहीं खाना चाहिए। भोजन खाते वक़्त चलना फिरना नहीं चाहिए।

शास्त्रों के मुताबिक जिस भी भोजन की थाली में बाल या मक्खी इत्यादि गिरी है , उसे सेवन नहीं करना चाहिए। अगर कोई भी हमे बेमन से और असम्मान , निरादर करके भोजन दे , वैसा खाना कभी भी नहीं खाना चाहिए।

जिस व्यक्ति में क्रोध हो , और वह आपको भोजन पड़ोसे , वह आपको नहीं खाना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक बासी भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति भोजन नहीं बनाना चाहता या आलसी हो , उसका दिया हुआ भोजन नहीं ग्रहण करना चाहिए।

अगर कोई व्यक्ति बिना नहाये और पोशाक बदले भोजन पड़ोसता है , तो वह भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। अगर कोई भी व्यक्ति ने भ्रूण हत्या जैसे अपराध किये है , उनका दिया हुआ भोजन भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। किसी के लिए बनाये हुए भोजन और ब्राह्मणो द्वारा ठुकराए हुए भोजन को ग्रहण नहीं करना चाहिए। बांयें  हाथ से पड़ोसे   हुए भोजन को भी ग्रहण नहीं करना चाहिए।

 हमे  मुख से फूक मारे हुए भोजन को ग्रहण नहीं करना चाहिए।   अगर किसी इंसान को मल और पेशाब आये , तो उस वक़्त उसे भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। कोई अगर गुस्से में खाना पड़ोस रहा है , उसे ग्रहण नहीं करना चाहिए। जो लोग ब्राह्मणो को पूजते नहीं है , उसके पड़ोसे हुए भोजन को नहीं खाना चाहिए। जो लोग गलत कार्यो में लिप्त होते है , उनका दिया  हुआ भोजन कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए। मांस और शराब  बेचने  वाले  , चोर , डाकू और दुश्मनो का भोजन कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए। विडंबना यह है कि आज के लोग शास्त्रों  के इन नियमो का पालन नहीं करते है।  इसका असर उनके मन और शरीर पर पड़ता है।

सात्विक भोजन के सेवन से शरीर सेहतमंद रहता है। सब्ज़ियां और बिना तला और मसालेदार  रहित खाना स्वस्थ के लिए अच्छा होता है। ऐसे भोजन खाने से हमारा मन और शरीर तरोताज़ा रहता है और हमेशा हम सक्रीय रहते है।  मंदिर में लगाया हुआ भोग स्वादिष्ट होता है। इसे खाने से मन प्रसन्न हो जाता है। इसकी वजह से शुद्ध वातावरण और शुद्ध विचार।  अगर हम सात्विक भोजन नहीं करते है तो हमे कार्य करने के लिए ताकत नहीं मिलती है और व्यक्ति आलस महसूस  करता है। अगर व्यक्ति तले हुए भोजन और जंक फ़ूड का सेवन करता है, तो उसका ध्यान एक स्थान पर नहीं टिकता है। तले हुए भोजन स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं होते है। इससे व्यक्ति  के सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मन स्थिर नहीं रहता है। जिन्दगी में लक्ष्य प्राप्ति के लिए सात्विक भोजन का सेवन करना अच्छा होता है।

निष्कर्ष

हमे ज़िन्दगी में हमेशा सही राह पर चलना चाहिए। सत्यनिष्ठा की नीति और परिश्रम करके रोजगार करना चाहिए।  उन्ही पैसो से खाने का बंदोबस्त करे और ईश्वर का शुक्रिया करे। ईश्वार को स्मरण करते हुए भोजन करे , इससे मन और मस्तिष्क दोनों शुद्ध रहेगा।

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