मेरा प्रिय मित्र पर निबंध

मेरा प्रिय मित्र पर निबंध
Hindi essay on my best Friend for class 1,2,3,4,5,6,7,8. 

मेरा नाम मोहित है। में कक्षा सात का छात्र हुँ। यू तो मेरी क्लास में बहुत से विद्यार्थी पढ़ते है लेकिन इस सब मे अर्जुन को में बहुत पसंद करता हूँ। वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। वह होशियार होने के साथ ही बहुत मेहनती भी है। वेसे भी जिसका कोई दोस्त नही होता वह बहुत दुर्भाग्यशाली होता है, और ऐसा जो मानता है कि उसके बहुत से मित्र है। लेकिन सच्चा मित्र किसी -किसी को ही मिलता है। पर में इस मामले में बहुत की ख़ुशनसीबी हुँ। क्योंकि मेरा मित्र अर्जुन सच्चा होने के साथ ही बहुत ईमानदार और मेहनती है।

अर्जुन मन का सुन्दर लड़का है। वह अच्छे परिवार से सम्बन्ध रखता है। उसके पिता सरकारी डॉक्टर है। उसकी माँ एक कॉलेज में अध्यपिका है। वह भी मुझे अत्यंत प्यार और स्नेह करता है। वह मेरी कोई भी परेशानी या उलझनें में मेरी बहुत मदद करता है। उसकी प्रसंशा सभी विद्यार्थी करते है। ऐसे मित्र बनाये नही जाते पहचाने जाते है। जिसे मेने पहचाना। ओर ऐसे मित्रो की मित्रता दिन व दिन बढ़ती हैं ना कि कम होती है।

वह सदैव साफ स्कूल की पोशाक पहनकर विद्यालय आता है। वह विद्यालय नियमित आता है। वह पढ़ने में भी होशियार है। उसका सपना बड़े होकर एक अच्छा व्यक्ति के साथ कुछ अच्छा कार्य करने वाला इंसान भी बनाना है। वह सदैव अपना गृहकार्य पूरा करता है। वह मेरा गृहकार्य करने में भी सहायता करता है। जब मुझे कोई परेशानी होती है। तो वो हमेशा मेरी मदद करता है। उसमें एक अच्छे मित्र के सभी गुण मौजूद है।

वह विद्यालय में भी अनुशासन के साथ रहता है। वह अपने अध्यपको की आज्ञा पालन करता है। वह उन्हें कभी किसी शिकायत का अवसर नही देता है। उसके सभी अध्यापक भी उसकी बहुत प्रशंसा करते है।

वह गरीब बच्चों की भी आर्थिक मदद करता है। वह धनी डॉक्टर का पुत्र है। किंतु उसे धनी होने का जरा सा भी घमंड नही है। वह कभी -कभी अपनी कक्षा के गरीब बच्चों की फ़ीस , ड्रेस तथा किताबों की व्यवस्था भी अपने पिताजी से कहकर करवाता है।

वह अच्छे विचारों तथा उत्तम स्वभाव का लड़का है। वह अपना समय कभी बर्बाद नही करता है। वह विद्यालय के विभिन्न्न खेलो में भी भाग लेता है । वह विद्यालय के क्रिकेट टीम का सदस्य है। उसे महापुरुषों की जीवनी पड़ने तथा उनसे प्रेरणा प्राप्त करने का शोक है । वह रोज समाचारपत्र भी पढ़ता है। वह मुझे भी अधिक पढ़ने ओर समय बर्बाद ना करने की सलाह देता है। वास्तव में अर्जुन मेरा सच्चा मित्र है। तथा ईशवर द्वारा दिया मुझे एक वरदान है।

वेसे भी जिस व्यक्ति का कोई दोस्त नही होता है वह बहुत दुर्भाग्यशाली होता है। और ऐसा व्यक्ति जो मानता है कि उसके कई मित्र है लेकिन सच्चा मित्र कोई नही है। वह उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यशाली है। एक चापलूस मित्र से भी अधिक बुरा होता है। सच्चे मित्र हमारे दुःखो को बाटते है व प्रसन्नता कई गुना करते है। ऐसे मित्र बनाये नही जाते ,पहचाने जाते है। उसकी मित्रता समय के साथ बढ़ती है। उन्ही मित्रो सा मेरा सच्चा मित्र अर्जुन है। जिसमें ये सभी गुण मौजूद है। और मुझे उसपे गर्व है।

 

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