[Monday, 3 August] रक्षाबंधन (कच्चे धागों का पक्का बंधन) 

मेरा प्यारा घर पर निबंध

इस दुनिया में सभी प्रकार के लोग रहते हैं। कुछ सौभाग्यशाली हैं जिनके पास सुविधाएं हैं जबकि कुछ के पास नहीं हैं। भारत जैसे देश में, जहां बहुसंख्यक आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। मैं अपने आपको  शुक्रगुज़ार मानती हूँ कि मैं चार दीवारों और एक छत से सुरक्षित हूँ। दुनिया में बहुत से लोग फुटपाथ पर अपनी ज़िन्दगी गुजार देते है, मैं अपने आपको खुशनसीब मानती हूँ कि मेरा पास परिवार है और सर ढकने के लिए एक छोटा मगर खूबसूरत घर है।

मेरे माता-पिता की कड़ी और कठोर मेहनत है जिसने मुझे यह घर के रूप में आशीर्वाद दिया है। आज की दुनिया में बहुत से लोग हमेशा उन चीजों के बारे में शिकायत कर रहे हैं जो उनके पास नहीं हैं। जिसके पास घर है वह बंगला चाहता है। जिस के पास बंगला है, वह महल चाहता है। एक महल में रहने वाला एक द्वीप चाहता है। यह कभी न खत्म होने वाली ख्वाइश शुरू हो जाती है। अगर हम अपने से ऊपर के लोगों की बजाय अपने से नीचे के लोगों को देखें, तो हम जीवन में खुश रहेंगे।

घर छोटा बड़ा नहीं होता है। घर तो बस घर होता है। घर वही होता है, जहाँ माँ और पिताजी, पूरा परिवार साथ रहता है। घर से हमारे कई भाव जुड़े होते है। मेरा घर पश्चिम बंगाल राज्य में है। मेरे घर में तीन कमरे, दो बालकनी और हवादार खिड़कियाँ है। घर के आस-पास पेड़ और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर उद्यान है। मेरे घर में छोटा से पुस्तकालय है, जिसमे मेरी कई सारी किताबे है। मुझे किताबे पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। किताबो से बेहतर साथी और कोई  नहीं हो सकता है।

मेरा घर कोलकाता शहर से चार घंटे की दूरी पर है। मेरी माँ ने अपने पसंद अनुसार घर को बेहद सुन्दर सजाया है। मेरी माँ ने दीवारों को सजाने के लिए खूबसूरत चित्रकारी की है, जिससे घर का सौंदर्य काफी बढ़ गया है। बालकनी में चाय पीने और किताबे इत्यादि पढ़ने के लिए छोटी झूलने वाली कुर्सी है जिसपर बैठकर पापा अखबार पढ़ते है। मेरी माँ को बगीचे में पौधे लगाना बेहद अच्छा लगता है। घर पर हम सभी तरीके के सुख सुविधाओं से पूर्ण सुरक्षित रहते है।

मेरे घर में हर त्यौहार को उत्साह के साथ मनाया जाता है। चाहे दिवाली हो या दुर्गापूजा, हर उत्सव में माँ और मैं घर को सजाते है।  उत्सव का रंग पूरे घर के दीवारों पर चढ़ जाता है। घर सिर्फ पत्थरो और ईंटो से नहीं बनती बल्कि प्यार और पारिवारिक भावनाओ से निर्मित होती है। एक परिवार के लिए घर की कीमत क्या होती है, वह दरअसल परिवार वाले जानते है।

घर के साथ बचपन की यादें, माँ की ममता, पिताजी का दुलार जुड़ा हुआ होता है। चाहे हम कितनी तरक्की क्यों ना कर ले, लेकिन घर से, घर के उस पवित्र वातावरण और उस ममता की सुगंध से हम कभी जुदा नहीं हो पाते है। एक इंसान के लिए उसका घर अनमोल होता है। अक्सर लोग मकान और घर के बीच भ्रमित हो जाते है। मकान ईंट , संगमरमर के पत्थर, बालू और सीमेंट इत्यादि से बनते है। 

घर वह होता है जहाँ परिवार और उनका प्यार होता है। मकान में रहने वाले लोग उसे घर का रूप दे देते है। कभी लोगो को बड़ी देर से  अपने घर के महत्व का एहसास होता है। ज़िन्दगी की बहुत सारी घटनाएं मनुष्य का दृष्टिकोण बदल देती है, तब जाकर उन्हें घर परिवार का एहसास होता है। अपने घर की सुंदरता की प्रशंसा करना सबको अच्छा लगता है। छुट्टियों में पहले जब मैं अपने दादाजी के घर जाती थी। मेरे दादा-दादी के आँगन में एक छोटा सा बगीचा है और चारो तरफ हरियाली है। इसके अलावा, इसमें दो पेड़ भी हैं। एक अनार का पेड़ और दूसरा आम का पेड़। बचपन में हम गर्मियों में मैं और मेरी चचेरी बहन आम तोड़ते थे। वह मीठी यादें और फलो के स्वाद मुझे आज भी याद है।

जब भी मेरे दोस्त मेरे घर पर आते हैं, वे बहुत सारी तस्वीरें क्लिक करते हैं। घर के सारे इंटीरियर के डेकोरेशन मेरी माँ ने किये है। मेरे पापा ने तिनके-तिनके जोड़कर इस खूबसूरत घर का निर्माण किया है जिसकी जितनी भी तारीफ़ की जाए, उतनी कम है।

घर अपनों से बनता है। घर की सुंदरता और शान्ति  अपने लोगो और अपने परिवार से जुड़ी हुयी होती है। बहुत सारे लोग बड़े बड़े मकान बना लेते है, लेकिन उनके पास परिवार के सदस्य नहीं होते, जो मकान को घर बना सके। घर एकता, प्यार और शान्ति का प्रतीक है। मैं आज अपने घर से दूर हूँ।  माँ के हाथ का बना हुआ घर  के खाने की याद आज भी मुझे आती है, जिसके कारण घर से दूर रहने का गम भी सताता है।

निष्कर्ष

घर की याद मुझे हमेशा आती है। इस समय हमें घर के असली कीमत का पता चलता है, जब हम अपने घर से दूर होते है। माता – पिता ने मुझे हमेशा अनुशासन का अनुकरण करना मुझे सिखाया है और जीवन के हर पहलु से रूबरू करवाया है।

अक्सर जब हम अपने घर से दूर होते है, तब हमे घर और परिवार की एहमियत का सही माईनो में पता चलता है। घर दुनिया की सबसे प्यारी जगह है। हम दुनिया के किसी भी कोने में चले जाए, घर जैसी शान्ति हमे कहीं नहीं मिल पाती है। मुझे अपने घर की सुंदरता और सादगी से प्यार है और उम्मीद करती हूँ  कि यह हमेशा ऐसा ही बना रहे।

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