[Monday, 3 August] रक्षाबंधन (कच्चे धागों का पक्का बंधन) 

आंतकवाद और मानवता पर निबंध

आंतकवाद ने मानव जाति पर क्रूर प्रहार किया है। मानवता का तात्पर्य है दया और संवेदना और अच्छे बुरे में सोचने जैसी शक्ति, प्रेम भाव जैसी भावनाओं का समावेश है। आंतकवाद, जैसा की हम सब जानते है कि मानव जाति के प्रति बिना किसी कारण हमला और लाखो मासूम लोगो को मारना और पूरे देश की प्रगति और उसके आत्मविश्वास को चकनाचूर कर देना जैसे नकारात्मक कार्य आंतकवाद करता है। आंतकवाद जिसने न केवल हमारे देश बल्कि पूरी दुनिया की नीव हिलाकर रख दी है। आंतकवादी दानव बनकर मनुष्य जाति का कतल कर रहा है। आंतकवादी वह लोग है जो धर्म और गलत समूह के हाथ अपने सोचने समझने की शक्ति खत्म कर देते है। वह भी इंसान है, फर्क बस इतना है उनके अंदर से इंसानियत खत्म हो गयी है।

आये दिन खबरों में बम ब्लास्ट और विभिन्न क्षेत्रों पर हमला, मासूमो की निर्मम हत्या, यह सुनकर दिल काँप उठता है। आतंकवादियों के लिए हिंसा और खून खराबा उनकी जीने की शैली बन गयी है। उन्हें अपने कुकृत्य का कोई भी पछतावा नहीं है। उनके मन से इंसानियत जैसे शब्द मिट गए है। उनकी समझ पर ताला लग चूका है। ऐसे लोगो को बक्शा नहीं जा सकता है, इसलिए विश्व के सभी देशो को एक जुट होकर आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। अभी तक सरकार इस पर पूरी तरीके से नियंत्रण करने में असमर्थ रही है, नतीजा पूरी मानव जाति को यह सहन करना पड़ रहा है।

आंतकवाद से फैलाई गयी नफरत पूरी दुनिया में एक जहर जैसा बन गया है। मनुष्य ने हर क्षेत्र में विजय प्राप्त की है चाहे वह धरती हो या अंतरिक्ष, लेकिन कहीं ना कहीं अपने पड़ोसी देशो के साथ शांति और प्यार से रहना नहीं सीख पाया है। कभी कभी एक सवाल हमेशा मन में आता है क्या सच में मनुष्य सभ्य बन पाया है या अभी भी विभिन्न शताब्दियों पुराना आदिमानव जैसा जीवन जी रहा है।  दुनिया के देशो में फैल रही नफरत ने अपनी सीमा लाँघ कर आंतकवाद का रूप धारण कर लिया है। आंतकवाद के तूफ़ान ने ना जाने कितने अनगिनत लोगो के घर तबाह कर दिए है।

महात्मा गाँधी ने हमे सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलना सिखाया है। लेकिन दानव रूपी आंतकवादियों ने आंतकवाद को जन्म देकर हिंसा के भयानक रूप को दुनिया के सभी देशो में फैलाया। आंतकवादियों का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में आराजकता का माहौल बनाना है। इनका लक्ष्य है पूरे विश्व में आतंक का बिगुल बजाना और कई मासूम युवको को भड़का कर अपनी तरह हिंसक बनाना। फिछले वर्ष भारत में पुलवामा आंतकवादी हमला भयानक और निंदनीय था। यहाँ आंतकवादियों ने बस में बैठे भारतीय जवानो पर हमला किया और पूरी बस को बम से उड़ा दिया। यह हमला कश्मीर में हुआ था। इस हमले में हमने जांबाज़ अफसर खो दिए। कई परिवारों ने अपना बेटा, अपना पति, भाई और पिता को खो दिया। उनके परिवारों के साथ और पूरे देश में गम का माहौल छा गया, जिसे आज तक हम भूला नहीं पाए है।

पुलवामा हमले के पश्चात  प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी चुप नहीं बैठे और पाकिस्तान पर रातों रात एयर स्ट्राइक करने की रणनीति बनायीं। इस एयर स्ट्राइक में भारतीय वायु सेना ने आंतकवादी अड्डों को ढूंढ़कर उन्हें ख़त्म किया। यह हमला pok  में घुसकर किया गया था।

कश्मीर घाटी में मासूम युवको को धर्म के नाम पर भड़काकर और दूसरे धर्म सम्प्रदायों के प्रति जलन और द्वेष उतपन्न करके उनके हाथों में बंदूके थमा दी जाती है और आतंकवादी बनने पर मज़बूर किया जाता है। ज़रूरत है युवको में जागरूकता फैलाना और उन्हें यह समझना की देश सभी के लिए है और देश सभी के हितों की परवाह करता है।

अब वक़्त आ गया है आंतकवाद को उसकी जड़ से उखाड़ फेकने का। हम सभी देशवासियों को एक जुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़नी है और भारत सरकार और अपने जवानो का साथ देना होगा। सिर्फ रोने से और डर कर हम अपने घरो पर छिप नहीं सकते है। अब सभी को निडर होकर लड़ाई करनी होगी। आंतकवाद की हैवानियत को दूर करना होगा। अब वक़्त आ गया है की मानवता पर कहर बरसाने वाले लोगो को बक्शा ना जाये और हर देश को अपनी सुरक्षा इस कदर बढ़ानी होगी कि किसी भी प्रकार की अमानवीय घटना ना घटे।

निष्कर्ष

भारत जितनी प्रगति कर रहा, उसे देख कर कुछ विदेशी देशो को परेशानी हो रही है। इसलिए वह आंतकवाद को हमारे देश में फैलाकर देश की प्रगति को रोकना चाहते है। नफरत और हिंसा को देश में फैलाने कि लिए आंतकवाद का सहारा ले रहे है ताकि देश की प्रगति ना हो और देश के लोग डर में जीए। हमे उनको उनके गलत इरादों में कामयाब नहीं होने देना है। आंतकवाद विश्व के लगभग सभी देशो के लिए परेशानी बन गया है। अगर इसे वक़्त रहते समाप्त नहीं किया गया, तो देश की अर्थव्यवस्था, लोगो की ज़िन्दगी और देश की प्रगति मुश्किल में पड़ जायेगी। आंतकवाद मानवता पर एक बहुत बड़ा अभिशाप है जिसके लिए देश को और अधिक गंभीर होने की ज़रूरत है।

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