Important:11 जुलाई, विश्व जनसंख्या दिवस पर निबंध World Population Day

समाचार पत्र पर निबंध

समाचार पत्र पर निबंध।
समाचार पत्र की दैनिक जीवन में आवश्यकता

समाचार पत्र दूरसंचार के माध्यमों में से एक है। रेडियो, टेलीविज़न और समाचार पत्र हमारे जीवन की विशेष ज़रूरतें है। समाचार पत्र का अपना स्थान है जिसे हम नकार नहीं सकते है। प्रातःकाल की शुरुआत समाचार पत्र से होती है। सुबह दिन के चाय के साथ समाचार पत्र मनुष्य के हाथ में न हो तो उनका दिन अच्छे से नहीं गुजरता है। समाचार पत्र के माध्यम से हम देश-विदेश की सारी छोटी बड़ी जानकारी प्राप्त कर लेते है।

राजनीति और प्रधानमन्त्री से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण जानकारियां हमे समाचार पत्र प्रदान करता है। छात्रों को समाचार पत्र से कई लाभ मिलते है। अगर छात्र दैनिक रूप से अखबार पढ़े तो उनकी शब्दावली यानी अंग्रेजी में वोकैबुलरी का ज्ञान बढ़ जाता है। इससे भाषा सम्बंधित ज्ञान का संचार होता है। हिंदी और अंग्रेजी के साथ साथ भारत में हर राजकीय भाषा का अखबार उपलब्ध है। बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलगु, कन्नड़ इत्यादि हर भाषा के समाचार पत्र उपलब्ध है।

हिंदी भाषा के लोकप्रिय समाचार पत्रों के नाम है दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिंदुस्तान टाइम्स, पंजाब केसरी, नवभारत टाइम्स आदि। समाचार पत्र साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक और दैनिक 4 प्रकार के होते है। अखबार मनुष्य को दुनिया में होने वाली सामजिक , आर्थिक, खेल -कूद, मनोरंजन और साहित्यिक हर प्रकार के वर्ग की जानकारी प्रदान करता है। दूरदर्शन और आकाशवाणी की तुलना में समाचार पत्र गहन अध्ययन कर विश्तृत रूप से समाचार पत्रों को ग्राहकों तक पहुंचाते है।

प्राचीन काल में सन्देश पहुंचाने हेतु कबूतरों और घोड़ों का इस्तेमाल किया जाता था। समाचार पहुँचने में बहुत देर लग जाती थी। भारत में अंग्रेज़ों के शासन काल में समाचार पत्रों की खोज हुयी थी। भारत में सन 1780 को पहला समाचार दी बंगाल गैजेट कोलकाता राज्य में प्रकाशित हुआ था।

छात्र जो अंग्रेजी अथवा हिंदी में कमजोर है वह अंग्रेजी और हिंदी के  अखबारों का दैनिक रूप से अध्ययन कर सकते है। उसमे newspaper लेटर्स, एडिटोरियल कॉलम से नयी चीज़ें सिख सकते है। राजनीति और अर्थशास्त्र के छात्र इससे संबंधित जानकारियां समाचार पत्रों से प्राप्त कर लेते है। इससे उनका ज्ञान हर क्षेत्र में व्यापक हो जाता है।

उदहारण स्वरुप जो विद्यार्थी अर्थशास्त्र के विषय में जानना चाहते है वह उसका पृष्ट पढ़े, जो विज्ञान संबंधित जानकारी चाहिए वह पृष्ट पढ़ सकते है। विद्यालयों के पुस्तकालय में भी हिंदी और अंग्रेजी संचार पत्र का प्रबंध रहता है ताकि छात्र को दुनिया के बारें में सामान्य ज्ञान रहे इससे छात्रों का मस्तिष्क विकास होता है।

समाचार पत्र में नौकरी संबंधित जानकारियां मिलती है जिसकी वजह से युवा वर्ग नौकरी के बारे में जान लेते है। अखबार में नौकरी के  इस्तेहार निजी और सरकारी कंपनियों द्वारा प्रदान किया जाता है। जिसे पढ़कर वह सही पते पर पहुंचकर इंटरव्यू प्रणाली में हिस्सा लेते है।

कई बेरोजगारों को नौकरी के बारे में जानकारी अखबारों से मिलती है। अखबारों में व्यापारी और दूकानदार कई प्रकार के विज्ञापन देते  है जैसे घर के जमीन, फ्लैट किराए संबंधित सूचना, कार बेचना या खरीदना ऐसे विषयों की जानकारी लोगों को मिलती है। लोग अपने ज़रूरत के अनुसार लोगों से सम्पर्क स्थापित करते है अगर ऐसे कोई भी सूचना उन्हें चाहिए हो। ज्योतिष अपनी कुंडलियों संबंधित दैनिक भविष्यवाणी की सूचना लोगों को अखबारों से मिलती है। लोगों को यह पता चलता है कि आज का दिन उनका कैसे बितेगा।

समाचार पत्रों से आर्थिक और बाजार के मूल्य, कानून नीति और GST जैसे कई जानकारियाँ हमे रोज़ मिलती है। देश विदेशों से जुड़ी अच्छी -बुरी सारी जानकारियां हमे अख़बारों से मिलती है। आजकल घर में रहने महिलाएं खाना पकाने की पद्धतियां भी समाचार पत्रों से लेती है। अखबारों में खाना बनाने की लज़्ज़तदार रेसपीएस भी छपती है। अखबार प्रकाशकों के लिए बहुत माईने रखता है। अखबार प्रकाशन से कई लोगों, सम्पादकों की आजीवन नौकरी जुड़ी हुयी होती है। अखबार प्रकाशन उद्योग एक बहुत विशाल व्यापार है।

समाचारों के बिना बुजुर्ग लोगों का दिन नहीं कटता है। समाचार पत्र उनके बहुत अच्छे मित्र है। वह समाचार पत्रों से सामाजिक से लेकर राजनितिक सारी जानकारियाँ पढ़ते है और अपने मित्रों की टोली से उसपर विचार-विमर्श करना नहीं भूलते है। समाचार पत्रों में वैवाहिक कॉलम छपते है जिससे देखकर युवक और युवतिआं अपना मनपसंद साथी ढूंढ सकते है। अख़बारों में नंबर छपे रहते है जिसे विवाह संबंधित सम्पर्क किया जा सकता है। समाचार पत्रों में टुटोरिअल कॉलम भी प्रकशित होते है जिससे छात्र अपने विषय के अध्यापकों से ट्यूशन के लिए सम्पर्क कर सकते है।

समाचार पत्र जब महीनो पुराने हो जाते है तब लोग इन्हे इकट्ठा करके रद्दी वाले को बेच देते है जिससे वह थोड़ा पैसे कमा लेते है। समाचार पत्रिकाओं की वजह से रद्दी वाले भी अपना थोड़ा रोज़गार कर लेते है।

उपसंहार

आज कल जैसे अखबार अपनी महत्वता को खो रहा है। इंटरनेट के आगमन के साथ लोग इंटरनेट पर जाकर सारे खबरें पढ़ लेते है और समाचार पत्रों पर ज़्यादा निर्भर नहीं रहते है। लेकिन फिर भी अख़बारों को पढ़ने वाले लोगों की कमी नहीं है। लोग अपने व्यस्त जीवन से अखबार पढ़ने के लिए गुणवत्ता समय निकाल लेते है। चाहे कितने भी दूरसंचार के अनोखे माध्यम आ जाये लेकिन समाचार पत्रिका अपनी जगह बनाये रखेगी और बनायीं हुयी है। अखबारों के बैगर हमारा जीवन अधूरा है।

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