[Monday, 3 August] रक्षाबंधन (कच्चे धागों का पक्का बंधन) 

पुरानी पीढ़ी और नयी पीढ़ी में अंतर

पुरानी पीढ़ी और नयी पीढ़ी में अंतर पर निबंध
Hindi essay on Generation Gap.

भारत में स्वतंत्रता से पहले जन्मे हुए लोग और स्वतंत्रता के पश्चात जन्मे हुए लोगो के सोचने का तरीका बिलकुल अलग है। 21  शताब्दी के लोगो के सोचने का तरीका बिलकुल अलग और आधुनिक ख्याल के है। विभिन्न युगों में पैदा हुए लोग के सोच एक- दूसरे से भिन्न होते हैं। दुनिया तेज़ी से बदल रही है और इस प्रकार अलग-अलग समय में पैदा हुए लोगों के रहन -सहन बीच अंतर होना स्वाभाविक है।

भारत की बात करें तो आजादी से पहले पैदा हुए लोग आज के पैदा हुए लोगों से बिलकुल अलग है। अलग हैं। दो पीढ़ियों की सोच में बहुत बड़ा अंतर है। पुरानी और नवीन पीढ़ी के लोगो के सांस्कृतिक, आर्थिक, नैतिक मूल्य, व्यवहारिक ज्ञान और सामाजिक परिवेश के बीच बहुत विशाल अंतर है। इस अंतर को हम जनरेशन गैप बोलते है।

बदलते समय के अनुसार लोगो के जीने का तरीका, सोचने का तरीका, सम्पूर्ण व्यवहार में अदभुत परिवर्तन आता है। लोगो के ज़िन्दगी जीने का तरीका पीढ़ी दर पीढ़ी बदलती रहती है। परिवर्तन जिन्दगी का अहम पहलु है। माता – पिता और बच्चो के बीच भी इस अंतर को मापा जा सकता है, जब बच्चे बड़े हो जाते है। बच्चे और अभिभावक अपने पीढ़ी के मुताबिक चीज़े करते है। माता-पिता अपने पीढ़ी से सीखी हुयी चीज़े बच्चो को सिखाते है, और बच्चो से उसका अनुकरण करने के लिए कहते है। यहीं से कहीं ना कहीं मतभेद आरम्भ होता है। जेनरेशन गैप दो पीढ़ियों के बीच अंतर को दर्शाने के लिए एक शब्द अंकित किया गया है। जेनेरशन गैप का प्रभाव माता -पिता और संतान के रिश्ते पर साफ़ तौर पर दिखाई देता है। सोच में बदलाव के कारण जिन्दगी के किसी भी मोड़ पर अभिभावक और सन्तानो के मध्य  टकराव हो सकते है।

समाज निरंतर तीव्र गति से बदल रहा है। लोगो के जीवन शैली, विचारधारा, उनकी राय, विश्वास  समय चक्र के साथ बदलता रहता है। यह परिवर्तन नए विचारों को जन्म देता है और अनुचित रूढ़ियों को भस्म कर एक नए और सकारात्मक सोच के साथ समाज का निर्माण होता है। हमेशा अधिकांश समय इन दो पीढ़ियों के बीच कहीं ना कहीं संघर्ष बना रहता है।

पीढ़ीओं के सोच प्रत्येक व्यक्ति के पीढ़ी के अनुसार होते है। जिस पीढ़ी में व्यक्ति ने जीवन शैली और मूल्यों को जीया है, उसी के  के अनुसार चलता है, इसलिए दूसरी पीढ़ी के लोगो के साथ बातचीत करने पर मतभेद होते रहते है। व्यक्ति अपने परिवार में भी पीढ़ी अंतराल को गौर कर और भली -भाँती महसूस कर सकता है।

दादा दादी के सोच और उनका रहन -सहन माता – पिता से एकदम भिन्न होता है। एक ही विषय पर दोनों के विचार अलग हो सकते है, इसमें कोई संदेह नहीं है। इसी परिवर्तन और फेर बदल को हम पीढ़ी अंतराल अर्थात जनरेशन गैप कहते है। आजकल के युवा स्वतंत्र होकर जीना पसंद करते है, उन्हें हस्तक्षेप पसंद नहीं है। उन्हें निजी जीवन जीना ज़्यादा सुखदायी लगता है। लेकिन उनके अभिभावक की सोच यहाँ एकदम अलग है। पीढ़ी अंतराल को पूर्ण रूप से समाप्त नहीं किया जा सकता है। अगर एक साथ दोनों पीढ़ी शांत होकर सूझ -बूझ के साथ फैसला करे, तो अभिभावक और संतान का टकराव कम हो सकता है।

ज़िन्दगी के बदलाव के साथ अगर लोग थोड़ा सा परिवर्तन लोग अपने जीवन में लाये, तो जिन्दगी बेहतर हो जाती है। 1960 के दशक में पीढ़ी अंतराल जैसे नए तथ्य रिश्तों में उजागर हुए। शोध के मुताबिक युवा पीढ़ी अपने माँ – पिता के विचारो से बिलकुल अलग निकले थे। पीढ़ी अंतराल एक दिलचस्प और रोचक कांसेप्ट है। हम सोच सकते है अगर पीढ़ियों में बदलाव ना होता, तो हमारी प्रगति और सोचने समझने की क्षमता सीमित हो जाती।

परिवारों में जनरेशन गैप की वजह से छोटे – मोटे टकराव होते रहते है। अगर जनरेशन गैप नहीं होता, तो संसार में कोई फेर बदल नहीं होता। हर क्षेत्र की प्रगति और सोचने के तरीके पीढ़ियों के सोच  के कारण बंध कर रह जाते। इसलिए जनरेशन गैप आवश्यक है।  नयी पीढ़ी नए सोच और समाज को जन्म देता है।

दुनिया में आये दिन पहनावा, फैशन का तरीका बदल रहा है। नए खोज और आविष्कार हो रहे है, क्यों कि नए पीढ़ी के सोच, तरीके और प्रक्रियाएं बदल रहे है, कुछ नया करने का जूनून बना हुआ है। इसी वजह से दुनिया में प्रौद्योगिकी और तकनीकों में काफी प्रगति हो रही है। यह सब समय के साथ पीढ़ियों में बदलाव का नतीजा है।

जेनेरशन गैप के कारण बहुत बदलाव आये है। पहले के ज़माने में लोग अक्सर संयुक्त परिवार में रहते थे, आजकल सिर्फ छोटे परिवार में लोग रहना पसंद करते है, क्यों कि उन्हें लगता है, वे आज़ाद तरीके से जी पाएंगे और कोई भी उनके जीवन में दखल अंदाज़ी नहीं कर पायेगा। आजकल लोगो अपने निजी जीवन में रहने के लिए अपने अभिभावकों से दूर रहने में ज़्यादा खुशी महसूस करते है।

पहले के ज़माने में लोगो के पास फोन नहीं हुआ करता था। मुश्किल से लोग बाहर के टेलीफोन बूथ पर जाकर परिजनों को कॉल किया करते थे। आजकल की पीढ़ी के लोग स्मार्टफोन के बैगर गुजारा नहीं कर पाते, हर मुश्किल का हल उन्हें अपने फोन और इंटरनेट पर जाकर मिलता है।

आजकल की पीढ़ी के पास अपनों के लिए ज़्यादा वक़्त नहीं है, पहले के ज़माने में यह उपकरण नहीं थे इसलिए लोग ज़्यादातर समय अपने परिवार के लोगो के साथ व्यतीत करते थे। आजकल का फैशन और पहनावे का तरीका बदल गया है। आजकल के लोग सजावट की दुनिया में खोये रहते है, पहले के ज़माने में सादगी होती थी और पारम्परिक पोशाक और आभूषण लोग पहनते थे। पहले लोग अपने मित्रो और परिजनों के साथ सुख -दुःख की बातें करते थे। मगर आज की पीढ़ी को पार्टी, पिकनिक से ज़्यादा लगाव है।

निष्कर्ष

पीढ़ियों के इस अंतर को व्यक्ति समझ और स्वीकृति के साथ संभाल सकता है। एक पीढ़ी के लोग दूसरे पीढ़ी के लोगो से बहुत अलग होते हैं जो स्वाभाविक है। लेकिन, समस्या तब उत्पन्न होती है जब विभिन्न पीढ़ियों के लोग अपने विचारों और विश्वासों को दूसरे पर थोपने की कोशिश करते है और इसकी के कारण रिश्तों में तनाव उत्पन्न हो सकता है।  इसलिए पुरानी पीढ़ी और नए पीढ़ी के लोग एक दूसरे के सोच और फैसलों का सम्मान करे और एक दूसरे के सोच को स्वीकार करे, तब मतभेद नहीं होगा।

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