भारत में शिक्षा के निजीकरण पर निबंध

देश के स्वतंत्र होने के बाद बीते 5 दशकों में देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। स्वतंत्रता पूर्व देश में मात्र 3 विश्वविद्यालय थे। वहीं, अब विश्वविद्यालयों की संख्या 250 से अधिक पहुंच गई है। आज हम इस लेख में भारत में निजी कॉलेज या शिक्षा पर निबंध लिखेंगे। साथ ही जानेंगे हमारे देश में शिक्षा के क्या हाल है…


शिक्षा क्या है?

शिक्षा शब्द की उत्पत्ति 2 लैटिन शब्दों से मिलकर हुई है। educare जिसका अर्थ होता है प्रशिक्षित करना और educere जिसका अर्थ है निर्देशित करना। जो भी कार्य व्यक्ति को नवीन अनुभव और नवीन ज्ञान प्रदान करता हैं वह शिक्षा हैं। विद्यालय में ही नहीं आप कहीं भी शिक्षा को प्राप्त कर सकते है। शिक्षा के द्वारा छात्रों का सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विकास किया जाता हैं। नई शिक्षण संस्थानों की स्थापना के कारण नवयुवकों को रोजगार नए अवसर उपलब्ध हो रहे शिक्षण से संबंधित व्यवसायों को भी गति मिल रही हैं। बता दें, पिछले कुछ सालों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई हैं।

शिक्षा के प्रकार

शिक्षा के तीन प्रकार है…

औपचारिक शिक्षा

अनौपचारिक शिक्षा

निरोपचारिक शिक्षा

औपचारिक शिक्षा
इस प्रकार की शिक्षा विद्यार्थियों को विद्यालय में प्रदान की जाती हैं। यह शिक्षा प्राप्त कर छात्र वास्तविक अनुभव की प्राप्ति करते हैं। इस दौरान विद्यार्थियों में समस्या-समाधान के कौशल का विकास अच्छे से होता हैं।

अनौपचारिक शिक्षा
इस तरह की शिक्षा छात्रों को विद्यालय से नहीं, बल्कि समाज, परिवार से प्राप्त होती हैं। इस प्रकार की शिक्षा को आप छात्र के अंदर डाल सकते है। यह शिक्षा छात्र अपनी इच्छा से ही ग्रहण करते हैं। इसलिए इसे अनौपचारिक शिक्षा कहते है। बता दें, इस प्रकार की शिक्षा कही भी, कभी भी प्राप्त की जा सकती हैं।

निरोपचारिक शिक्षा
यह शिक्षा औपचारिक और अनौपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षाओं का मिश्रित रूप हैं, क्योंकि इसमें औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा के गुणों का समावेश होता हैं।

भारत में शिक्षा का निजीकरण
शिक्षा के निजीकरण के कारण तेजी से शिक्षा का प्रचार हो रहा है। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल हो जाते है फिर किसी व्यावसायिक या अन्य पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिल पाता, तब वह अधिक धन खर्च करके निजी कॉलेज से मनोवांछित शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं, इस तरह शिक्षा के निजीकरण के कारण देश का धन सकारात्मक कार्यों में लग रहा हैं।

शिक्षा में निजीकरण के लाभ
हर चीज़ के लाभ और हानि दोनों पहलु होते है। यदि शिक्षा में निजीकरण के लाभ की बात करें, तो जगह-जगह डीम्ड विश्वविद्यालय खुल रहे हैं। आप आसानी से किसी भी विश्वविद्यालयों में आसानी से एडमिशन ले सकते है। साथ ही कोचिंग और ट्यूशन को बढ़ावा मिल रहा है।

शिक्षा में निजीकरण के नुकसान शिक्षा के व्यावसायीकरण से भारत में निजी शिक्षण संस्थाओं की बाढ़ सी आ गई हैं। मगर शिक्षा के निजीकरण का लाभ निर्धन लोगों को नहीं मिल पा रहा हैं। इसका मुख्य कारण है कि शिक्षा का मंहना होना। वहीं, शहरों के निजी विद्यालयों की बात करें, तो प्राथमिक स्तर की कक्षाओं के बच्चों से भी 1 हजार से लेकर 5 हजार रुपए तक मासिक शुल्क लिया जाता हैं। आम आदमी को अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए इतने शुल्क वहन करने में काफी दिक्कत आती है।

निष्कर्ष

शिक्षा हमारे जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। शिक्षा से मनुष्य के रहन-सहन का पता चलता है। शिक्षा व्यक्ति को आदर्शवादी बनाती हैं और उसमें नैतिक-मूल्यों का विकास करती हैं। शिक्षा प्राप्त कर व्यक्ति अपनी जन्मजात शक्तियों और योग्यताओं से परिचित होता हैं। बता दें, शिक्षा के द्वारा ही एक समाज अपना विकास करता हैं और अपनी एक अलग पहचान बनाता हैं।

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