प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध

प्लास्टिक ज़्यादातर लोग पहले इस्तेमाल किया करते थे। अभी भी बहुत से जगहों पर इसका इस्तेमाल लोग कर रहे है। लोगो को अब सतर्क हो जाना चाहिए क्यूंकि प्लास्टिक प्रदूषण से पर्यावरण और जीव जंतु निश्चित तौर पर समाप्त हो जाएंगे।  प्लास्टिक प्रदूषण दुनिया की गंभीर परेशानियों में से एक है। प्लास्टिक को उपयोग करने के बाद लोग यहाँ वहां फेंक देते है।  लोगो को यह बताना ज़रूरी है प्लास्टिक में जाइलिन , बेंजीन इत्यादि  जैसे जहरीले पदार्थ है जो जल्द विघटित नहीं होते  है।  प्लास्टिक बायोडेग्रेडेबल सामग्री नहीं है।  प्लास्टिक को विघटित होने में हज़ारो वर्ष लग जाते है।  मनुष्य को प्लास्टिक के विघटित होने का सही समय अभी भी  मालुम नहीं है। इसका रोजाना इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।

प्लास्टिक के टूथब्रश, फर्नीचर  से लेकर बाल्टी तक ज़्यादातर चीज़ों का उपयोग लोग करते है। रोज़ाना प्लास्टिक के इस्तेमाल से कैंसर इत्यादि जैसे बीमारियां हो रही है।  प्लास्टिक के बोतलों में लगातार  पानी पीने से स्वास्थ्य खराब हो सकता है।  प्लास्टिक से  कुछ खतरनाक रसायन निकलते है जो पानी में घुल जाते है। प्लास्टिक सिंथेटिक पॉलीमर है जो हज़ारो वर्षो तक समुद्र तल के नीचे वैसा का वैसा पड़ा  रहता है।

समुद्र में रहने वाली मछली प्लास्टिक को खाना समझकर खा लेती है।  यह उसके गले में फंस जाता है और वह मर जाती है। प्लास्टिक का  उपयोग लोग खाना पैकिंग के लिए भी  करते है।  प्लास्टिक के डब्बे और चमच लेकर लोग दफ्तर जाते है। बच्चे प्लास्टिक से बने  खिलौने लेकर खेलते है। मनुष्य को प्लास्टिक की  सामग्रियों पर ज़्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। आजकल कुछ  दुकानों और शॉपिंग मॉल में प्लास्टिक की थैलिओं पर प्रतिबंध लगाया गया है।  दुकानों पर कागज़ और कपड़े की थैली मिलती है। लोग प्लास्टिक के उपयोग से पाईपो तक का निर्माण करते है।  यह बिलकुल अच्छा नहीं है।

प्लास्टिक से मृदा प्रदूषण होता है। प्लास्टिक को विघटित होने में कई वर्ष लग जाते है। मनुष्य को खुद नहीं पाता कि प्लास्टिक की विघटन प्रक्रिया का वास्तविक समय क्या है ?ज़्यादातर लोग प्लास्टिक को जमीन के अंदर गाढ़ देते है।  इससे प्लास्टिक कुछ समय बाद  खतरनाक रसायन और गैस छोड़ता है। इसकी वजह से  मिटटी की उपजाऊ शक्ति भी ना के बराबर हो जाती  है।  अगर कोई फसल उगाई भी गयी तो उस फसल में जहरीले रसायन के मिले होने का भय रहता है।

प्लास्टिक से वायु प्रदूषण भी होता है।  प्लास्टिक का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।  इस पर अंकुश लगाने के लिए कुछ लोग प्लास्टिक को जला देते है। प्लास्टिक को जलाने से और अधिक बुरा होता है और प्रदूषण फैलता है ।  इससे निकलने वाले गैस से मनुष्य को कई तरह की बीमारियां हो सकती है।  इस गैस में ज़्यादा देर तक व्यक्ति सांस नहीं ले पाता है।  प्लास्टिक को मनुष्य ने बनाया है और खुद मनुष्य इसके कब्ज़े में आ गया है।  प्लास्टिक को नष्ट करने से मनुष्य खुद कई समस्याओं को जन्म दे रहा है।  मनुष्य को ऐसे प्लास्टिक का उपयोग करना चाहिए जिसे रीसायकल किया जा सके। प्लास्टिक मनुष्य के जीवन में जहर घोल रहा है।  मनुष्य अपनी  कई आवश्यकताओ के लिए प्लास्टिक पर निर्भर है।  बच्चो के दूध के बोतल के निप्पल, डाइपर  से लेकर सुन्दर खिलौने भी प्लास्टिक से बने है।  अब वक़्त आ गया है कि मनुष्य जब बाजार जाए तो घर से कपड़े या कागज़ की  थैली लेकर जाए जिससे दुकानदारों को प्लास्टिक का उपयोग ना करना पड़े। दुकानदारों को भी प्लास्टिक की थैली में ग्राहकों को सामान नहीं देना चाहिए।

प्लास्टिक से समुद्री जीवो पर सबसे अधिक बुरा प्रभाव पड़ रहा है।  सड़क किनारे भी पशु जैसे गाय प्लास्टिक को भोजन समझ कर खा लेते है।  बाद में उसकी मौत हो जाती है। मानव द्वारा प्लास्टिक से बनी वस्तुओं को कुछ दिन इस्तेमाल किया जाता है और बाद में कचरे के डेढ़ में फेंक दिया जाता है।  जानवर को कचरे में अगर कुछ प्लास्टिक के थैली में भोजन दिखता है तो वह भोजन को प्लास्टिक के समेत भी खा लेते है। प्लास्टिक पशुओं के गले और फेफड़ो में जाकर अटक जाती है और वे मर जाते है। प्लास्टिक को नष्ट करने का विचार अपने मन से निकाल देना चाहिए। अगर यह बेवकूफी हम करते है तो खुद प्रदूषण को बढ़ावा देते है।

हमे खाने के सामग्रियों को स्टील के डब्बो में रखना चाहिए। प्लास्टिक के बुरे प्रभाव को लोगो में फैलाना चाहिए ताकि लोगो में इस समस्या को लेकर जागरूक हो जाए । लोगो को  पीईटीई  जैसे प्लास्टिक का चुनाव करना चाहिए जिसे रीसायकल करना आसान हो। सभी शिक्षा संस्थानों जैसे स्कूल और कॉलेज में प्लास्टिक के भयंकर प्रभावों को बताने के लिए कुछ कार्यक्रम जैसे निबंध , भाषण प्रतियोगिता आयोजित करवानी चाहिए ताकि बच्चो को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के विषय में पता चल सके। विद्यार्थी इस तरह के कदमो से  जागरूक हो जाएंगे और प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करेंगे।  प्लास्टिक के चीज़ों को कचरे में ना फेंके बल्कि उन्हें रीसायकल करे अथवा उनका उपयोग करना बंद करे।

प्लास्टिक के बैग , बोतले कई इलेक्ट्रॉनिक की चीज़ें नगरों और जलाशयों के जल को रोक रहे है। संसार में सौ मिलियन टन प्लास्टिक जैसे वस्तु का निर्माण हो रहा है और यह जल्दी विघटित भी नहीं होता है।  हम सभी को सचेत हो जाना चाहिए और इसका इस्तेमाल कतई नहीं करना  चाहिए।

निष्कर्ष

प्लास्टिक से बने वस्तुओं का इस्तेमाल हमे नहीं करना चाहिए।  प्लास्टिक की थैलिओं पर पहले से ही प्रतिबन्ध लग चूका है।  अब हम सभी को इस पर अमल करना चाहिए। मनुष्य को प्लास्टिक के उपयोग को सम्पूर्ण रूप से समाप्त कर देना चाहिए।  इससे प्रकृति , पर्यावरण और जीव जंतु सभी सुरक्षित रहेंगे। हम सभी को एकजुट होकर प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की चेष्टा करनी चाहिए ताकि हम आने वाले पीढ़ी को एक अच्छा, रोगमुक्त  और साफ़ पर्यावरण के साथ अच्छी ज़िन्दगी दे सके।

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