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पर्यावरण संरक्षण में विद्यार्थिओं का योगदान

पर्यावरण संरक्षण में विद्यार्थिओं का योगदान हिंदी निबंध।

पर्यावरण को अंग्रेजी में कहते है एनवायरनमेंट। पर्यावरण वह स्तर है जहाँ हम मनुष्य, पशु, पक्षी, कीड़े, मकोड़े इत्यादि निवास करते है। पर्यावरण है तो हम है वरना कुछ भी नहीं। प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करना हमारा प्रथम कर्त्तव्य होना चाहिए लेकिन कहीं न कहीं हम इसकी अवहेलना कर रहे है। जिसके कठोर परिणाम हमे भुगतने पड़ रहे है।

पर्यावरण यानी वन, वृक्ष, पौधे, खूबसूरत पहाड़ और नदियाँ जैसे कुदरती संसाधन हमे भेंट में प्रकृति द्वारा दिया गया है। लेकिन मनुष्य ने अपने स्वार्थ भरे भावनाओं को पूरा करने के लिए इन्हे बरसो से नुक्सान पहुँचाने में ज़रा भी कसर न छोड़ी। वन, वृक्षों से हमे ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है, जिसके बिना मनुष्य की ज़िन्दगी असंभव है। वनो से हमे कीमती वस्तुएं प्राप्त होती है जैसे महंगी लकड़ियां और चन्दन जैसी लकड़ियां, फल, फूल इत्यादि प्राप्त होते है।

वनो का संरक्षण मनुष्य जाति के लिए अनिवार्य है। इसकी अवहेलना करना हमारे लिए नुकसानदेह साबित हुआ है और आगे होता रहेगा। पर्यावरण को अपने स्वार्थ-सिद्धि के लिए इस्तेमाल करना और उसके संरक्षण में कोई कार्य न करना अत्यंत निंदनीय है। कई बरसो से हम पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा रहे है, उसका अनुमान लगाना कठिन है। हमे वनो का संरक्षण करना चाहिए। हम अपने घर लोगों को पर्यावरण संरक्षण  के प्रति जागरूक करने की आवशयकता है। हम ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाएंगे तो हम प्रदुषण को रोक सकते है। आजकल सरकार ने अवैद्य रूप से वन को नुक्सान करने वालों का खिलाफ कड़े कदम उठाये है। कई वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन धरा के अनुसार वनो को या जंगली जानवरो को नुक्सान पहुंचने को कानून जुर्म घोषित किया है। मिटटी, नदियाँ इन सभी का संरक्षण निश्चित रूप से ज़रूरी है।

अगर पर्यावरण को इसी तरीके से हम नुकशान पहुंचाएंगे तो वह दिन दूर नहीं की मनुष्य जाति का विनाश हो जायेगा। हम घर और कारखाने, शॉपिंग मॉल बनाने के लिए वृक्ष को धररले से काट रहे है। वृक्षों को काटना जिसे डेफोरेस्टशन कहा जाता है। हमने कृषि करने पर जीतना ध्यान दिया है पर वनो के संरक्षण पर एकदम नहीं। हमे वृक्षारोपण को प्राथमिकता देते हुए अत्यधिक पौधे लगाने की ज़रूरत है। वृक्षों को तेज़ी से काटने की वजह से वायु में आक्सीजन की भरपूर कमी हो रही है।

वृक्षों या वनो का संरक्षण से हम बाढ़ और साइल erosion जैसी परिस्थितयों को हम काबू में ला सकते है और इसमें सक्षम भी हुए है। वृक्षारोपण करने से हम मिटटी का संरक्षण बखूभी कर सकते है। सीढ़ीनुमा खेत और फर्टीलिज़ेर्स का सही इस्तेमाल हम खेतो पर कर सकते है ताकि मिटटी का संरक्षण यानी कंज़र्वेशन हो सके।

आज विद्यार्थियों ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए कई कदम उठाये है। 1 जुलाई को वन महोत्सव मनाया जाता है जहां विद्यार्थी अपने शिक्षकों के साथ मिलकर पौधे लगाते है। विद्यार्थी कई प्रकार के सेमिनार्स, भाषण के द्वारा लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिश करते है। आजकल एनवायर्नमेंटल साइंस की पढ़ाई करके विद्यार्थी पर्यावरण के संरक्षण के कई क्षेत्रों में कार्यरत है।

पर्यावरण के संरक्षण से हम पृथ्वी के वातावरण में संतुलन ला सकते है। प्रदुषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसे चीज़ो पर संतुलन पा सकते है। लेकिन यह तभी संभव है जब हम सब भारतीय मिलकर आगे बढे और इस संरक्षण में अपना भरपूर योगदान दे। ग्लोबल वार्मिंग से मनुष्य जाति और जानवरों का विनाश हो रहा है। नदियों का स्तर बढ़ रहा है जिससे बाढ़ आ रही है। इन् सब चीज़ों को नियंत्रित करना मनुष्य जाति का धर्म है।

आजकल स्कूल बोर्ड्स में पर्यावरण की शिक्षा अनिवार्य कर दी गयी है। एनवायर्नमेंटल साइंस जैसे विषय करिकुलम में डाले गए है। ताकि बच्चे पौधों, वन और पर्यावरण के महत्व को समझे, विधार्थी कुछ को पर्यावरण संरक्शसन के लिए प्रतियोगिता और मेले करवाए जाते है ताकि वह पर्यावरण जैसे विषयों में रूचि ले सके।

विद्यार्थियों को कुछ पास के कम्युनिटी में ले जाकर ब्लू और ग्रीन बिन्स के मतलब को समझाया जाता है। विधार्थी पास के पार्क या उद्यानों में जाकर साफ़ -सफाई भी करते है। यह सब एनवायर्नमेंटल साइंस के प्रक्टिकल्स होते है। बच्चे अपने स्कूल और कॉलेज के कैंपसों की सफाई करते है। विधार्थी लोकल RWAs में और एनजीओ में काम कर सकते है। उनके कामों में भाग लेते है।

ओजोन लेयर की कमी के कारन युवी रेज़ पृथ्वी पर रही है जिससे कैंसर जैसी हानिकारक बीमारियां हो सकती है। विधार्थी ओजोन लेयर को नुक्सान पहुँचाने वाले चीज़ो को रोकने लिए लोगों में विशेष जागरूकता फैलाने की कोशिश कर रहे है। विधार्थी ऐसे चीज़ो का प्रयोग करते है जो एनवायरनमेंट फ्रेंडली हो। कागज़ को हम रीसायकल कर सकते है लेकिन प्लास्टिक को नहीं, प्लास्टिक समुद्र तल के नीचे वर्षों तक रह सकते है। अर्थात नॉन-बायोडिग्रेडेबल चीज़ों में आते है जो जल्दी decompose नहीं होते। पृथ्वी और पर्यावरण के लिए प्लास्टिक हानिकारक है। अब इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गयी है।

स्कूल के कैंपस को गन्दा नहीं करना चाहिए। अपने आस-पड़ोस में हर हफ्ते सफाई ज़रूरी है। कागज़ का इस्तेमाल सही से करे। क्यों की कागज़ बनाने के लिए कई बम्बू के वृक्ष काट दिए जाते है। जहाँ हम एक पेड़ काटे तो हमे चार पेड़ और लगाने चाहिए।

निष्कर्ष:

हमे स्कूलों के बगीचों में पौधे और फूलों के पौधे लगाने चाहिए। उन्हें पानी और खाद देते रहना चाहिए। हमे पशु और पक्षिओं के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। विधार्थी आजकल पशु -पक्षों के संरक्षण में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे है। कई एनजीओ भी इस पर मेहनत कर रही है। लोग पशुं को गोद ले रहे है और उन्हें घर में अपने सदस्यों जैसे प्यार करते है। आजकल विद्यार्थिओं का योगदान काबिले तारीफ़ है। आज के विद्यार्थी कल के ज़िम्मेदार नागरिक बनेगे। विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभा रहे है। विधार्थी रीसाइक्लिंग प्रोग्राम और एनर्जी कंज़र्वेशन के ज़रिये प्रकृति को संरक्षित करना चाहते है। विद्यार्थी अपने अभिभावकों को भी पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िमेदारी के लिए प्रेरित कर सकती है। अगर इसी तरीके से विधार्थी योगदान देते रहे तो अवश्य ही देश को प्रगति के मार्ग पर ले जायेंगे।

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