बैडमिंटन पर निबंध

प्रस्तावना

खेलकूद से हम चुस्त और तंदुरुस्त रहते है।  बैडमिंटन भी एक ऐसा ही खेल है जो  उसके शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रखता है।  आमतौर पर बच्चे और बड़े दोनों ही बैंडमिंटन खेलना पसंद करते है। बैडमिंटन खेल को खेलने के लिए अधिक लोगो की ज़रूरत नहीं होती  है। चाहे छुट्टी हो या पिकनिक बैडमिंटन रैकेट्स के साथ सभी बैडमिंटन खेलने के लिए तैयार हो जाते है। आमतौर पर हर विद्यालय और शिक्षा संस्थानों में बैडमिंटन खेला जाता है। बैडमिंटन खेलने वाले जाने माने खिलाड़ी जिन्होंने अपने देश भारत का गौरव बढ़ाया है , वह है पीवी सिंधू , साईना नेहवाल, प्रकाश पादुकोण  और गोपीचंद ऐसे  बेहतरीन और लोकप्रिय बैडमिंटन खिलाड़ी है। हमारे देश के इन महान बैडमिंटन खिलाड़ियों ने देश का नाम ऊँचा किया है। बैडमिंटन को खेलने के लिए न्यूनतम दो खिलाड़ियों की ज़रूरत होती है।  यह दो खिलाड़ी एक दूसरे के विपरीत खेलते है। इसमें रैकेट और शटलकॉक का उपयोग किया जाता है।

हमारे देश में सबसे ज़्यादा बैडमिंटन खेला जाता है। शटलकॉक चिड़िया को भी कहा जाता है। शटलकॉक में चिड़ियों के छोटे छोटे पंख लगे होते है। बैडमिंटन खेलकर मन खुश हो जाता है और मानसिक थकान भी दूर हो जाती है।  अक्सर लोग अपने आपको तंदुरुस्त रखने के लिए बैडमिंटन खेलते है। सुबह शाम किसी भी समय इस खेल को आसानी से खेला जा सकता है।

बैडमिंटन खेलने के लिए किसी तरह की शारीरिक ज़ोर की आवश्यकता नहीं होती है। बैडमिंटन विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी पूरे जोश और एकाग्रता के साथ खेलते है।  भारत के  नामचीन और अच्छी खिलाड़ी साईना नेहवाल के खेल के सभी दीवाने है। लोग जब अपने परिजनों और दोस्तों के साथ यह खेल खेलते है तो अपने अनुसार नियम बना लेते है।

बैडमिंटन खेल के कुछ ज़रूरी नियम होते है। दोनों खिलाड़ियों को एक एक बैडमिंटन रैकेट दिया जाता है।  दोनों खिलाड़ी अपने अपने जगह पर  जाकर खड़े हो जाते है। दोनों खिलाड़ियों के बीच में एक नेट होता है।  खिलाड़ी को शटलकॉक, नेट के ऊपर से मारना होता है। शटलकॉक को बैडमिंटन रैकेट से एक खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ी की ओर मारता है।

जहाँ बैडमिंटन खेली जाती है , उस जगह को बैडमिंटन कोर्ट कहते है।  कोर्ट की लम्बाई चौदह मीटर और चौड़ाई  छह मीटर  तक होती है। बैडमिंटन में भी सिक्का उछालकर टॉस किया जाता है। टॉस करने के पश्चात खिलाड़ी फैसला करते है कि वह कौन सा भाग चुनेगे और कौन सा खिलाड़ी पहले सर्व करेगा। बैडमिंटन  में  जो खिलाड़ी पहले शटलकॉक को  अपने विपरीत खिलाड़ी की ओर  मारता है  , उसे सर्वर कहते है। जो दूसरा खिलाड़ी शटलकॉक को  रोकता है उसे रिसीवर कहते है। सर्वर जब सर्व करता है तो उसके प्रतिद्वंदी खिलाड़ी के सर्विस लाइन के पार जाना चाहिए वरना इसे मिस मान लिया जाता है। बैडमिंटन को एक ही बार में शटलकॉक को हिट करके प्रतिद्वंदी के पाले में भेजना पड़ता है। रैकेट के वजन ८० ग्राम से ९१ ग्राम तक होता है।

बैडमिंटन खेलने के लिए अधिक स्थान की ज़रूरत नहीं होती है। इस खेल में अधिक मेहनत नहीं लगती है। बैडमिंटन खेल में जहां ज्यादा हवा चलती  है वहां यह  खेल नहीं सकते है। हवा के कारण शटलकॉक यहां – वहाँ जा सकता है। बैडमिंटन खेलने के लिए शरीर में फुर्ती होना ज़रूरी है। बैडमिंटन खेलने के लिए एकाग्रता की ज़रूरत होती है। अगर कभी भी लोगो को अपने काम और पढ़ाई से थोड़ी फुर्सत मिल जाए तो बैडमिंटन खेलकर मन खुश हो जाता है।

बैडमिंटन में चार लोग एक साथ खेल सकते है। इस खेल को कहीं भी खेला जा सकता है। दोनों प्रतियोगियों के  बीच में  एक जाल लगा दिया जाता है। बैडमिंटन में शटलकॉक जितने बार भी नीचे गिरती है , उसके अनुसार ही बैडमिंटन खेल में हार जीत का फैसला होता है।

देश में हर वर्ष राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन खेल आयोजित किया जाता है। इसके अलावा जिला , राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी बैडमिंटन खेला जाता है। जो खिलाड़ी जीतता है , उसे मेडल दिया जाता है। भारत से सिर्फ पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी अंतराष्ट्रीय  स्तर पर बेहतरीन बैडमिंटन खेल रही है। बैडमिंटन को थोड़े से यानी कम जगह में आसानी से खेला जा सकता है।

जैसे क्रिकेट गली मोहल्ले में खेला जाता है , उसी प्रकार बैडमिंटन खेल को भी लोग खेलते है। लोकप्रिय खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण  और गोपीचंद जी ने आल इंग्लैंड  ओपन प्रतियोगिता को जीता था और कई ऐसे चैंपियनशिप जीतकर भारत का नाम ऊँचा किया। यह खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ियों को प्रेरित करते है ताकि वह भविष्य में अच्छा खेले और बैडमिंटन जगत में अपना  नाम कमाए।

निष्कर्ष

बैडमिंटन खेलने से शरीर में मोटापा नहीं आता है। बैडमिंटन खेलने से सोचने की शक्ति में विकास होता है। बैडमिंटन खेलने से दिल से संबंधित समस्याएं नहीं होती है। बैडमिंटन खेलने से शरीर , पैरो ओर हाथों की मांसपेशियां फिट और मज़बूत होती है। आजकल के सभी युवाओ को बैडमिंटन खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और जो अच्छा खेलते है वह प्रशिक्षण लेकर बैडमिंटन में अपना करियर भी बना सकते है।

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