मेरी मौसी की शादी पर निबंध/एस्से

मेरी मौसी की शादी पर निबंध। शादी पर एस्से।

शादी और विवाह से रिश्तों में मिठास आती रिवाजों और परंपराओं से यह खुशी दुगनी हो जाती है।

शादी की परिभाषा: विवाह जिसे शादी भी कहा जाता है यह दो लोगों के बीच एक सामाजिक व धार्मिक मान्यता प्राप्त मिलन है।यह ना केवल संस्कृति और धर्म के बीच बल्कि किसी भी संस्कृति और धर्म के इतिहास में सब जगह अपने अपने तरीकों से की जाती हैं।

शादी एक ऐसा शब्द होता है जिसके सुनने पर ही आंखों के सामने एक खुशी का माहौल आ जाता है चहल पहल रौनक यह सब हमें महसूस होने लगता है और अगर शादी आपकी किसी नजदीकी रिश्ते में किसी की हो तो और मजा आ जाता है।

हर बार गर्मियों में हम कहीं ना कहीं छुट्टियां मनाने जाते थे पर इस बार हम हमारे नाना-नानी के घर जाएंगे वह इसलिए क्योंकि मेरी मौसी की शादी होगी इस बात की डबल खुशी है कि एक तो नाना-नानी के घर ओर ऊपर से मेरी मौसी की शादी, सबसे पहले तो हम मौसी की शादी के लिए जाने के लिए तैयार हो गए और शादी के लिए तोहफे वगेरे, नए कपड़े और सभी तैयारी के साथ हम मौसी की शादी पर जाने के लिए तैयार हो गए।

मेरी मौसी की शादी या विवाह का वर्णन इस प्रकार है

मेरी मौसी का विवाह एक वर्ष पहले एक पढ़े-लिखे अच्छी जगह नौकरी करने वाले लड़के से तय हो गया था। और विवाह अप्रैल में निश्चित हो गया अभी मेरे पास पूरे 1 महीने बाकी थे।
नाना- नानी के घर हम एक महीने पहले ही विवाह में शामिल होने के लिए चले गए और वह कुछ रिश्तेदार पहले से ही आ चुके थे घर मे बोहोत रौनक ओर चहल पहल थी।

घर के निकट ही एक विवाह स्थल लिया गया था। वहां पर एक लंबा चौड़ा पंडाल सज़ा था। मुख्य द्वार को बहुत ही सुंदर किले का रूप प्रदान किया गया था द्वार के पास एक फव्वारा लगाया था जिसमें से विद्युत चलित फव्वारे की भीनी भीनी बूंदे बरस रही थी ओर उनमे से बोहोत ही प्यारी खुशबू आ रही थी।

सर्वप्रथम मेरी मौसी की सगाई का मुहूर्त निकाला गया जो कि निश्चित तारीख को हो गई लेकिन महोत्सव का बड़ा उत्सव तो अब आने वाला था।

मेरी मौसी की शादी के लिए मेरी नाना – नानी जी ,मेरे मम्मी पापा और अन्य नजदीकी रिश्तेदारों ने मिलकर मेरी मौसी की शादी के लिए
गहने , नए कपड़े ,साड़ियां ,ओर रिस्तेदारों को देने के लिए धोतिया , वगैरा की खरीदारी शुरु कर दी और खरीदारी की यह प्रक्रिया चल रही थी। मेने भी मेरी मौसी की शादी के लिए अपने लिए दो तीन जोड़े सूट सिलवालिए थे ,मौसी की शादी का बहुत ही आकर्षक और सुंदर निमंत्रण पत्र छपवा कर सभी रिश्तेदारों और पहचान वालो के यहां भेज दिए गए थे,ओर सभी को फ़ोन करके भी आने का निमंत्रण दे दिया गया था।

मिठाइयों की तो कमी ही नहीं थी घर पर ही हलवाई बुला लिया गया था सब जगह हलचल मची थी आखिरकार शादी का दिन भी नजदीक आ ही गया।

शादी वाले दिन पंडाल में एक और खाने की व्यवस्था की गई थी मेंजो पर तरह- तरह के व्यंजन रखे गए थे खाने की चीजों में बहुत सारी वैरायटी रखी गई थी।

और सभी लोग बस अब बरात के आने की तैयारी में लग गए थे वर पक्ष की तैयारी और उनके स्वागत के लिए शहनाई वादक अपनी मधुर ध्वनि के साथ सबका मन मोह रहे थे और बरात के आगवन की स्वागत धुन बजा रहे थे।

बरात की तैयारी के लिए थाल सजाए गए ,और बारात जब मुख्य द्वार पर थी तब मेरे होने वाले मौसा जी को घोड़े से उतारा गया उन्हें तिलक किया गया उन की आरती उतारी गई फिर कन्या और वर दोनों को ही वर के लिए बने मंच पर बैठाया गया इस बीच सभी बराती और अन्य अतिथि खाने-पीने में लग गए और सभी आपस में प्रेम पूर्वक मिल रहे थे।वर और वधु दोनों ही बहुत ही सुंदर दिख रहे थे फिर जयमाला हुई जयमाला की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही थी ,दोनों ही पक्ष के लोगों ने दूल्हा-दुल्हन को उपहार स्वरुप आशीर्वाद प्रदान किया, मेरी मौसी का विवाह का दृश्य सचमुच बहुत ही सुंदर था ।हर प्रकार की अच्छी व्यवस्था की गई थी।

दूसरे दिन मेरी मौसी की विदाई की तैयारी हो रही थी। मुझे भी बहुत रोना आया पर एक बात और समझ आई कि विवाह भी जरूरी होता है जो विवाह की परम्परा है ।उसे निभाना भी अनिवार्य है यह सोच कर मैं बहुत खुश हुआ मेरी मौसी को एक रानी की तरह लग रही थी।उन्हें बहुत ही सुंदर से सजे धजे वाहन से विदा किया गया जिसमे मेरी मौसी ओर मौसाजी बैठे थे।और बराती भी अपने साथ लाये वाहन से रवाना हो गए मुझे मेरी मौसी ने बहुत प्यार और दुलार दिया और बोहोत सारा आशीर्वाद प्रदान किया।

फिर कुछ समय बाद हम भी हमारे घर लौट आए पर मैं मेरी मौसी की शादी केवसभी खूबसूरत और सुंदर लम्हों को कभी नहीं भूल सकता इन्हें मैं अपने साथ लेकर आया जिसे में जिंदगी भर नही भूल पाऊंगा।

सच में शादी एक ऐसा समारोह था जिसमें सभी धर्म ,जाति, वर्ग ,के लोग बहुत ही खुशी- खुशी मनाते हैं और सभी गीले शिकवे भूल कर आपस मे मिलते है मुझे मेरी मौसी की शादी के व्रतांत का वर्णन करके बोहोत अच्छा लगा।

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