[Monday, 3 August] रक्षाबंधन (कच्चे धागों का पक्का बंधन) 

मेरा शहर मेरी संस्कृति लेख, निबंध

मेरा शहर पीपलरावां , मेरी संस्कृति पर निबंध।

मेरा शहर, मेरी संस्कृति पर निबंध।
लेखिका - अर्निका गुप्ता(पीपलरावां) 

मेरा नगर पीपलरावां जिसे छोटी काशी भी कहा जाता है। यहाँ का रहन सहन, पहनावा, सब कुछ एकदम रंगीला है। यह मालवा में बसा एक छोटा सा गांव है जहाँ प्राचीन काल में कई विद्वानों ने जन्म लिया। यहाँ स्थित अम्बे माँ का मंदिर काफी प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है। यहाँ होने वाली माँ अम्बे की आरती बाकी स्थानों पर होने वाली आरती से पूर्णतः अलग है।

दस हजार जनसंख्या के साथ यह गांव खाद्य सम्पदा से सम्पन्न है। गणेश उत्सव में होने वाली आरती से लेकर नवरात्रि में होने वाले गर्बे, हर चीज बिलकुल अलग ढंग से होती है। नवरात्रि के समय यहाँ महिलाएं जंवारे लगा कर नवमीं को उन्हें विसर्जित करती है। ये जगह छोटी ज़रुर है पर यहाँ सोच से धनी लोग निवास करते है। विकास की बढ़ती इस दुनिया में इस नगर में काफी उन्नति हुई है।  शिक्षा, परिवहन, खेती, जीवन शैली, हर चीज में समय के साथ काफी बदलाव और विकास हुआ है।

पुराने समय में जहाँ सड़कें भी नहीं थी, आज यहाँ लंबी और पक्की सड़क आप हर गली में हर चौराहे पर देख सकते है। पीपलरावां न केवल गांव से नगर में परिवर्तित हुआ है, बल्कि यहाँ के लोगो ने स्वयं को समय के साथ काफी बदला है। बच्चों के साथ समानता का व्यवहार, शिक्षा में लड़कियों को लड़कों की तरह प्रोत्साहन दिया जाता है। को-रोना महामारी के दौरान नगर में सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्णतः पालन किया गया, पुलिस कर्मियों ने अपना सर्वस्व जनता की सेवा में लगा दिया।

यहाँ की गलियाँ बिलकुल मथुरा, वृन्दावन की तरह है। पुराने बनी हुई कुछ हवेलियाँ, घर आज भी यहाँ पुरखों के समय से उसी तरह बानी हुई है। बिजली, पानी, स्वास्थ्य केंद्र और तमाम रोज़मर्रा की इस्तेमाल की जाने वाली हर चीज यहाँ मौजूद है। आस पास के गांव जहाँ इतनी भी सुविधाएँ नहीं है, वे लोग यहाँ अपनी जरुरत की चीजें लेने आते है। हर वर्ष यहाँ मेला लगता है जिसमे घूमने आस पास के गांव के लोग इकट्ठा होते है।  यहाँ के लोग अनेक प्रकार के कार्य करके अपना जीवन निर्वाह करते है, प्रमुखता यहाँ खेती ही रोज़गार का साधन है। पुराने समय से चली आ रही किसान आज भी यहाँ हर किसी के घर के अनाज पानी का स्रोत है। 

यहाँ कई समाज के लोग निवास करते है जिनके अपने अपने रीति-रिवाज़ और परम्पराएँ है, जिन्हे लोग अपने ढंग से मानते है और उनका अनुसरण करते है। विभिन्न प्रजीतियो के लोग हर पर्व पर अपने ढंग से अपने ईष्ट देवता की पूजा करते है। विकास का दौर अभी जारी है जिसमे बहुत सी चीजों में सुधार होना बाकी है। मालवा में स्थित इस नगर में चिकित्सा का विकास प्रगति पर है। आगामी समय में यहाँ उच्च कोटि के चिकीत्सक होंगे जिससे नगर में होने वाली हर एक बीमारी के लिए नगर में ही इलाज संभव होगा।

यहाँ का वातावरण पूरी तरह से प्राकृत है, यहाँ नगर में एक तालाब और कई कुएँ पानी का स्रोत है। यहाँ घरों से कुछ ही दूरी पर बड़े बड़े पेड़ और खेत है जिनसे प्रकृति के करीब होने का एहसास होता है। अब तो यहाँ लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर भी काफी सजग है, कुछ लोग सुबह की सैर को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना चुके है तो कुछ लोग शाम के समय टहलते दिखाई देते है। यहाँ आम जन के घरों में भी कुएँ और नलकूप है जिनसे पानी की पूर्ति घरों में ही की जा सकती है।  बदलते समय और तकनीकी के चलते आज यहाँ लोग मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल बड़ी ही सुलभता के साथ कर पा रहे है।

गांव में भुखमरी, अकाल जैसी कोई समस्या ने कभी गांव की जनता को परेशान नहीं किया। मालवा में अतिथि को भगवान माना जाता है, यहाँ आने वाला हर एक अतिथि नगर में सम्मान पता है और लोग आज भी यहाँ भाईचारे की भावना क साथ अपना जीवन निर्वाह करते है। नगर में सुरक्षा की नजर से पुलिस थाना और नगर पंचायत दोनों है जो जरुरत के अनुसार अपना कार्य करते है। पुराने समय में समाज में व्याप्त कुरीतियाँ अब धीरे धीरे अपना रुख बदल रही है, देखते ही देखते समाज में आज परिजनों का व्यवहार और उनके दृष्टिकोण में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। लोग केवल खेती तक ही सीमित नहीं है, वे देश दुनिया में व्याप्त तमाम रोज़गार के अवसर के प्रति सजग है।

पुराने समय से चली आ रही सामाजिक कुरीतिया, बाल विवाह, सती प्रथा, दहेज़ प्रथा, लिंग भेद, आदि का अंत हो चुका है। आज ग्रामीण लोग भी अपने बच्चों को नयी सोच के साथ जीवन जीने की आज़ादी दे रहे है। लोग आज बेटियों को पढ़ाई जाने के लिए अपनी पूँजी उनकी शिक्षा पर व्यय कर रहे है। कहते है “अगर घर में एक महिला शिक्षित हो तो पूरे परिवार का भविष्य उज्जवल हो जाता है।

#  

Leave a Comment