मतदान चुनाव पर निबंध

मतदान(चुनाव) नहीं होता तो ? मतदान पर निबंध। 

अब्राहम लिंकन के अनुसार, “प्रजातंत्र जनता का जनता के लिए जनता द्वारा किया गया शासन है”

भारतीय संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को मत देने का अधिकार प्राप्त है, जिसके माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करती है, सरकार बनाने में ये तो मतदान के अधिकार के प्रयोग के बाद की अवस्था है इसके विपरीत यदि मतदान की व्यवस्था नहीं होती तो क्या होता? इस कथन पर विचार करना है।

यह तो जाहिर सी बात है, यदि मतदान नहीं होता तो चारो तरफ अराजकता ही अराजकता फ़ैल जाती, क्यूंकि मतदान की व्यवस्था हमारे संविधान निर्माताओं ने इसलिए किया था की जिससे नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके एवं सर्वोच्च पद पे बैठे लोग निरंकुश न हो सके, प्राचीनकाल में जब लोगो को मत देने का अधिकार नहीं था तो वहां राजा पूर्णतया निरंकुश होता था। एवं उसके द्वारा जनता पर तरह-तरह के अत्याचार किया जाता था और उन्हें दिए गए आदेश मानने के लिए बाध्य किया जाता था।

भारतीय इतिहास में महमूद गजनबी से लेकर औरंगज़ेब एवं हिटलर से लेकर सद्दाम हुसैन जैसे राजा अपनी निरंकुशता के लिए विश्व-प्रसिद्ध हैं, क्यूंकि इन सभी के शासन काल में मत तो क्या किसी को भी उनके विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाने का हक़ नहीं था। हमारे कानून निर्मातों ने शायद यह महसूस किया की एक स्वस्थ लोकतंत्र की शक्ति उस देश के नागरिको में निहित है और नागरिको की शक्ति मत देने के अधिकार में, इसी वजह से उन्होंने संविधान में मताधिकार को सर्वोच्च स्थान दिया।

यदि मतदान नहीं होता तो जंगलराज की परिकल्पना दूर नहीं थी जिस प्रकार जंगल का राजा शेर किसी भी वन्य जीव को मार के खा सकता है ठीक उसी प्रकार की व्यवस्था हमारे लिए भी होती। यदि मतदान नहीं होता तो हम अपने घरो में सुरक्षित नहीं सो रहे होते, आपराधिक प्रवित्ति के लोगो में किंचित मात्र भी शासन व्यवस्था का डर नहीं होता।

यदि मतदान नहीं होता तो कोई भी बलशाली व्यक्ति किसी भी निर्बल व्यक्ति को अपना दास बना लेता और फिर ग़ुलाम प्रथा का कभी भी अंत नहीं हो पाता, ये मत देने के अधिकार की ही शक्ति है जो कि जिन अनुसूचित जाति के लोगो को उच्च वर्ग के लोग अपने घरो में प्रवेश नहीं करने देते थे आज उन्ही के साथ
बैठ के भोजन करते हैं।

यदि मतदान नहीं होता तो एक ही परिवार के लोगो पीढ़ी दर पीढ़ी सत्ता का भोग करते और सत्ता पे उनका एकाधिकार हो जाता जैसा की प्राचीन काल में हुआ करता था, ये मतदान की ताकत है की जो सत्ता पक्ष में ये भय लाती है की यदि उन्होंने पद पे रहते हुए न्यायसंगत कार्य नहीं किये तो अगले चुनाव में जनता उनका चुनाव नहीं करेगी।

पहले और अब के समय में बहुत अंतर हो गया आज का नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है अब कोई भी सत्ता पक्ष अपना एकाधिकार स्थापित नहीं कर सकता क्युकी अब लोगो को मत देना का अधिकार जो प्राप्त है, भारत एक लोकतान्त्रिक देश है जिसकी आबादी डेढ़ सौ करोड़ से भी ज़्यादा है और इतने बड़े देश की कमान सँभालने के लिए एक शक्तिशाली एवं योग्य सरकार की आवश्यकता है जिसका अस्तित्व जनता के मतदान के अधिकार में छुपा हुआ है, अतः जहाँ तक मेरे विचार हैं बिना मतदान के तो हम एक सशक्त राष्ट् का सपना भी नहीं देख सकते हैं इसलिए मतदान का होना अत्यंत आवश्यक है।

जागृति अस्थाना-लेखक

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