भाई दूज – भैया दूज पर निबंध

भाई दूज – भैया दूज पर निबंध

 

“ना सोने की कामना, ना चांदी की आस,
भाई बहन का प्यार , हजारो हिरे मोती से ख़ास
,इसलिए तो इस रिश्ते का नाम
भाई दूज हैं।”

प्रस्तावना:- वैसे तो हमारे हिन्दू धर्म मे कई त्योहार होते है और सभी का अपना  अपना अलग ही महत्व होता है। जिन्हें हम हर्षोल्लास के साथ मनाते है। उनमें से ही एक त्योहार ” भैया दूज ” । जो कि भाई बहन के रिश्तों का प्रतीक माना जाता है। भारतीय समाज मे इस त्योहार का महत्वपूर्ण स्थान है। वैसे हमारे भारत की संस्कृति ही काफी है ! इन रिश्तों को मजबूत करने के लिए परंतु इन रिश्तों में ओर मजबूती ओर प्रेम और स्नेह को बढ़ाने के लिए ही भाई दूज का त्यौहार मनाने की परंपरा है। जिन्हें हमारे हिन्दू धर्म मे देवी देवताओं के मनाने के कारण ही हमारी संस्कृति में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। ओर पौराणिक काल से चले आ रहे त्योहार को हम पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाते है। इन्हें बदलना ओर इसमें कुछ भी बदलाव हम कभी भी लाने की कोशिश नही करते ओर इसलिए भाई दूज रिश्तों को मजबूती प्रदान करने वाला त्योहार है।

भाई दूज कब मनाया जाता हैं? भाई दूज भाई बहन के स्नेह और प्यार का प्रतीक का त्योहार है। ये कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीय को मनाया जाता है  साधारण बोलचाल कि भाषा मे दीवाली के दूसरे दिन इस त्योहार को मनाने की परंपरा है।

भाई दूज मनाने का महत्व:- हिन्दू समाज मे भाई दूज भाई बहन के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस त्योहार को बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाने की परंपरा है। इस त्योहार का सबसे अधिक महत्व भाई बहन के रिश्तों को मजबूत करने की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए जहाँ बहन अपने भाई को तिलक करके उसकी लंबी आयु की कामना करती है। वही भाई भी अपनी बहन को कोई ना कोई उपहार देकर अपना प्यार ओर स्नेह दर्शाता है।

भैया दूज मनाने की कथा:– दीवाली के दो दिन बाद मनाने वाले इस त्योहार के पीछे कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथा मिलती है। उन्ही पौराणिक कथाओं के अनुसार एक कथा इस प्रकार है की भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उन्होंने यम ओर यमुना नाम के पुत्र और पुत्री को जन्म दिया था। जब यमुना का विवाह हो गया तब यमुना अपने भाई यम को भोजन ग्रहण करने के लिए बुलाती थी। यम ने कई बार अपनी बहन का प्रस्ताव ठुकरा दिया वो सोचने लगा कि इस धरती पर कोई भी नही चाहेगा कि में उसके घर आउ क्योंकि में तो प्राणों को हरने वाला यमराज हु। पर मेरी बहन फिर भी मेरे को बार – बार आग्रह करके क्यों बुलाना चाहती है। परंतु कई बार अपनी बहन के आग्रह करने पर यम अपनी बहन के घर गए । जाने से पहले यमराज ने राह में आये जो भी नर्कवासी थे उन्हें उनके इस पाप से मुक्त कर दिया और जब बहन के घर गए तो बहन की ख़ुशी का ठिकाना नही रहा सबसे पहले उसने स्नान करके अपने भाई को माथे पर तिलक करके तरह तरह के व्यंजन परोसे, ओर जब भाई यम जाने लगा तो उन्होंने अपनी बहन यमुना को वरदान दिया कि आज के दिन जो भी बहन यमुना में स्नान करके अपने भाई को तिलक करके भोजन करवाएगी तो उसको ओर उसके भाई को यमराज का भी डर नही होगा । तभी से इस त्योहार का नाम यम दित्तिया पड़ गया है।

भाई दूज को मनाते कैसे है:- इस दिन बहने अपने भाई को भोजन के लिए आमंत्रित करती है। भोजन में खीर,पूड़ी ,जो भी व्यजन होते है ।उन्हें बनाने की परंपरा है।परंतु ये सब नही भी हो तो चावल की खीर या चावल का कोई भी व्यंजन बनाने को अधिक महत्व दिया जाता है।भोजन बनाकर भाई को कुमकुम ,हल्दी,चन्दन,आदि का तिलक करती है। ये त्योहार रक्षाबंधन त्योहार जैसा ही है।उसमें बहने अपने भाई की हाथों की कलाई में राखी बांधती है।उसी प्रकार इस त्योहार में भी ऐसा ही होता है।बस रक्षा सूत्र नही बांधती बहने ,पर अपने भाई के मस्तक पर कुमकुम का तिलक करके भगवान से उनकी लंबी आयु की कामना करती है ओर कामना करती हैं कि उसके भाई के जीवन में कोई विपक्ति और कोई परेशानी ना आये और वो हमेशा प्रगति करे और खुश रहे।ओर भाई भी अपनी बहन को प्रेम और स्नहे स्वरूप कोई ना कोई उपहार देता और अपना आशीर्वाद प्रदान करता है।कि उसकी बहन हमेशा खुश रहे।ईन त्योहार से रिश्तों में प्यार और मिठास उतपन्न होती है ।और वो मीठास जो भी भाई बहन में उत्पन होए उन्ही को बढ़ाने के लिए इस त्योहार का महत्वपूर्ण स्थान है।जो भाई बहन के रिश्तों को मजबूत बनाती है।

भाई दूज के दिन कुछ अन्य त्योहार
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भाई दूज के दिन ही कायस्थ समाज वाले अपने आराध्य देव चित्रगुप्त की पूजा करते है।इस दिन जिस प्रकार चित्रगुप्त स्वर्ग में सभी के जीवन का लेखा जोखा रखते है।उसी प्रकार व्यपारी वर्ग इस दिन ही अपने बहीखाता की पूजा करते है।उत्तर भारत मे इसी दिन शगोधनरा नामक पर्व मनाया जाता है।जो भाई दूज जैसा ही होता हैं।हमारे देश मे त्योहारो का नाम तो अलग हो सकते है पर उसको मनाने की परंपरा एक ही होती है।

भाई दूज त्योहारो के अन्य नाम
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हमारे भारत देश मे त्योहार भले ही एक हो और उन्हें मनाते भी सभी हो ।परंतु प्रयेक स्थान पर इन त्योहारो के नाम अलग प्रकार के होते है। व्यक्ति की भाषा अनुसार जैसे :- गोवा,महाराष्ट्र ,ओर कर्नाटक में इसे भाई बीज के नाम से जाना जाता है,
वही नेपाल में भाई टिका, बंगाल में भाऊ द्विज,भाई फोटा ओर मणीपुर में निगोल चकबा के रूप मे मनाया जाता है।कहने का तात्पर्य भाषा और बोली त्योहार का नाम भले ही बदल दे पर उन्हें मनाने का एक ही अर्थ है।प्यार, स्नेह,खुशी,ओर हर्ष जो कि बहन भाई की खुशी को दर्शाता है।जो इन रिश्तों को मजबूती प्रदान करता है।

उपसंहार
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जैसा प्रकार आप सभी को पता ही है ।कि भाई का बहन के लिए बचपन से ही चिंतित रहने की शुरुआत उसकी बहन के बचपन से ही शुरू हो जाती है बहन की रक्षा करना उसकी खुशी का ध्यान रखना भाई अपना फ़र्ज़ समझता है।और उस फर्ज को निभाता है।और बहन भी अपने भाई को प्यार स्नेह देती है।जिस प्रकार रक्षा बंधन में बहन भाई के हाथों में राखी बांधकर उस प्रेम और स्नेह को दर्शाती है।वहीँ भाई दूज के दिन उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।ओर भगवान से प्राथना करती है।कि उसके भाई का ये रक्षा वाला हाथ उसके पूरे जीवन में उसके सर पर बना रहे।

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