बाल दिवस पर निबंध

बाल दिवस पर निबंध: 14 नवम्बर
[Essay On Children’s Day]

भूमिका:- यह सर्वविदित है कि प्रत्येक दिन, तिथि, समय का अपना कोई न कोई अवश्य महत्व होता है। यह भी सर्वविदित है कि मुख्य रूप से हमारे देश के प्रत्येक तिथि, समय और दिन का सम्बंध लगभग किसी न किसी महत्वपूर्ण विषय से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि हमारे देश मे समय-समय पर सम्पन्न होने वाले उत्सव-आयोजन, पर्व त्योहार किसी महान पुरुष के जीवन, या किसी पौराणिक कथा-व्रतांत  या किसी ऐतिहासिक घटना से अवश्य ही सम्बंधित होते है। ये उत्सव आयोजन, पर्व  त्योहार चाहे समाजिक हो राष्ट्रीय हो, सभी के सभी का कोई न कोई आधार होता है। जिस प्रकार हम 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाते है, उसी प्रकार हम 14 नवम्बर को बाल-दिवस नेहरू जयंती के रूप में मनाते है।

बाल दिवस का शाब्दिक अर्थ:- बाल दिवस बच्चों के दिन के रूप मे मनाया जाता है। हमारे देश मे 14 नवम्बर को प्रतिवर्ष बाल दिवस के रूप मनाया जाता है। इस दिन को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाने का मुख्य कारण यही है कि हमारे देश के सर्वप्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चे अतिशय प्रिय लगते थे और बच्चे भी उन्हें बड़े प्यार से चाचा नेहरू कहा करते थे। उन के अपार प्रेम, स्नेह और लगाव का ही यह सुपरिणाम हुआ कि सभी बच्चे उनके जन्म दिन 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाने लगे। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी अपने जन्मदिन को बच्चो के असीम लगाव को अपने प्रति देखकर ‘बाल-दिवस’ के रूप में स्वीकार कर लिया।

यो तो आज भी बाल-दिवस 14 नवम्बर को प्रतेक साल खूब धूमधाम से स्कूल आदि में मनाया जाता है। तथापि सर्वप्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय बनाये गए बाल दिवसकी बात कुछ और ही थी। वह बाल दिवस सचमुच में हर प्रकार से अनूठा बाल-दिवस हुआ करता था। उस समय बाल दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमो में पंडित नेहरू स्वय ही भाग लिया करते थे। उनके लिए विशेष प्रकार की योजनाएं सरकारी और व्यक्तिगत स्तर पर स्वयं लागू किया करते थे। वे बाल दिवस के दिन अपने सभी कार्यक्रमो को रद करके स्वयं को बाल-दिवस के आयोजित कार्यक्रमो में लगा देते थे। उन्हें इस प्रकार अपने साथ पाकर बच्चे इस बाल दिवस को अपने जन्म दिवस से कही अधिक समझकर प्रसन्नता से बाग-बाग हो जाते थे। चाचा नेहरू भी उन्हें इस प्रकार प्रसन्ता से झूमते हुए देखकर फुले नही समाते थे। दर्शकगण तो उस दृश्य को देख-देखकर के अत्यधित निहाल हो उठते थे। वास्तव में उस समय मनाया जाने वाले बाल दिवस हर प्रकार से अनूठा और अत्यन्त रोचक लगता था।

बाल दिवस का दिन:- बाल दिवस हमारे देश में सब जगह बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दीन सारा देश प्रसन्नता की हिलोरे लेने लगता है। यह सबसे अधिक बच्चों में ही प्रसन्नता का ज्वार उमड़ता हुआ दिखाई देता है। बच्चों की प्रसन्नता देख-देख करके बड़े-बड़े जवान-व्रद्ध भी बाल दिवस को और अधिक रोचक बनाने के लिए अपना पूरा-पूरा योगदान दिया करते है। इसके लिए वे उनकी प्रतेक मांग को पूरी करने की कोशिश करते है। बच्चे भी अपने माता-पिता, हितेषियों और अभिवावकों की हर शिक्षा-आदेश का बड़े ही सम्मानपूर्वक पालन किया करते है। इससे वे बाल-दिवस का पूरा-पूरा आनंद उठाकर अत्यधिक सन्तोष का अनुभव प्राप्त करते है। बच्चों का इस तरह से बाल दिवस मनाए जाने से सर्वत्र एक अदभुत और आकर्षक छटा फैल जाती है।

यो तो बाल-दिवस वर्ष में एक बार ही आता है। लेकिन यह हर साल अपना अलग ही अनुभव छोड़ जाता है। हर साल एसा  लगता है, मानो पहली बार मनाया जा रहा है। इसके कुछ प्रमुख कारण है, वह यह की हर साल इस आयोजन में व्रद्धि होती है। इसे हर साल गत साल की अपेक्षा व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। यह भी बाल-समुदाय का ही उत्सव है। इसलिए इसमें घर परिवार, समाज और राष्ट्र के सभी वर्गों को भाग लेकर इसके लिए सहयोग देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। यह इसलिए कि बच्चों की भावना सभी बड़े प्यार से समझते है। सभी उनके बाल स्वभाव प्रवत्तियों को समझने के लिए उनके प्रति विवश हो जाते है। इसके साथ यह भी की पंडित नेहरू का बच्चों के प्रति प्यार की भावना वास्तव में अत्यधिक पेरणादायक थी। जिसका प्रभाव आज भी बना हुआ है।

यो तो बाल-दिवस का उत्सव हमारे देश मे व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाता है। इससे चारों और एक विशेष प्रकार सुखद वातावरण फैल जाता है। फिर भी देश की राजधानी दिल्ली में बाल-दिवस का उत्सव विशेष रूप से आयोजित किया जाता है। यहॉ सभी सरकारी संस्थान ही नही अपितु निजी संस्थान भी अपना कामकाज ठप कर के इस पर पूरा-पूरा अवकाश मनाते है। यहाँ स्कूली बच्चे बाल भवन एकत्रित होकर जाते है। वे ये तरह-तरह खेल व्यायाम का पर्दशन करते है। वहाँ की सभा मे भाग लेते है। इस दिन बच्चो के चाचा नेहरू के प्रिय स्थान तीन मूर्ति भवन की शोभा देखते ही बनती है। यहाँ पर भी नेहरू प्रदर्शनी आयोजित होती है और बाल सभाएं स्कूलों में बाल दिवस पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम के उपरान्त बच्चों को मिष्ठान वितरित किया जाता है। इससे बच्चों को विशेष आनन्द का अनुभव प्राप्त होता है।

उपसंहार:- यो तो हम इस बाल-दिवस को पंडित नेहरू के जन्म दिवस के रूप मनाते है। तथापि उसको हम एक बाल प्रेरक दिवस में भी समझते है। अगर ऐसी हमारी सदभावना है। तो निश्चय ही इसमें भाग लेने वाले बच्चों का हर प्रकार से सांस्कृतिक और बौद्धिक विकास अवश्य होगा।

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