चलचित्र से लाभ और हानियाँ

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प्रस्तावना

चलचित्र का तात्पर्य है चलता फिरता चित्र।  चलचित्र एक ऐसा मनोरंजन से भरा हुआ माध्यम है जिसे हर कोई पसंद करता है। इसमें ध्वनि और प्रकाश दोनों का समावेश है। मनोरंजन के कई सारे साधन उपलब्ध है।  उसमे से एक चलचित्र भी है। चलचित्र विज्ञान का एक अद्भुत आविष्कार है। चलचित्र का आविष्कार अमेरिकन वैज्ञानिक एडिसन ने किया था। पहले चलचित्र में कोई आवाज़ नहीं होती थी। वैज्ञानिको ने और अधिक तरक्की की और  समय के साथ साथ चित्रों में आवाज़ भर दिए गए। समय के साथ चित्रों में आवाज़ देने के प्रयत्न किये गए। पहले चलचित्र रंगीन नहीं बल्कि ब्लैक एंड वाइट  फिल्में हुआ करते थे।  जैसे जैसे समय बिता और विज्ञान ने उन्नति की , चलचित्रो में रंग भर दिए गए।  अर्थात लोग रंगीन चलचित्र का लुफ्त उठाने लगे।

चलचित्र की खोज टामस एल्वा एडिसन द्वारा अमरीका में किया गया था।  हमारे देश भारत में फिल्मो के संस्थापक दादा साहब फाल्के को माना  जाता है। आज हमारे देश में फिल्म जगत का व्यापार इतना अधिक बढ़ गया है कि एक फिल्म के निर्माण के पीछे करोड़ो रूपए लगाए जाते है।

चलचित्र सबसे सरल , सुगम और प्रसिद्द साधन है। चलचित्र का प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। मनुष्य के व्यस्त जीवन में बसी नीरसता से छुटकारा पाने का यह एक  सरल जरिया है। चलचित्र मनुष्य की मानसिक थकान और बोरियत को मिटाकर उसके ह्रदय में एक नविन उत्साह और उमंग भर देता है। चलचित्र सर्वप्रमुख और लोकप्रिय मनोरंजन से भरपूर  साधन है। मनुष्य की आवश्यकता बन चूका है चलचित्र।  मनुष्य अपने जिन्दगी के संघर्षमय पलो में से कुछ क्षण निकालकर चलचित्र का आनंद लेता है।  चलचित्र वास्तव में हमारे जीवन में विभिन्न खुशियों , समस्याओं , बुराईयों और अच्छाईयों को व्यक्त करने का एक अद्भुत  आईना है। चलचित्र ना केवल मनोरंजन देता है बल्कि ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक भी होता है। बाल विवाह , छुआछूत कई ऐसी समस्याओं को परदे पर दिखाकर लोगो को इसके प्रति जागरूक किया जाता है।  जीवन की हर छोटी और बड़ी समस्याएं और मुद्दे पर चलचित्र का निर्माण किया जाता है।

चलचित्र के अंतर्गत लोग संगीत , नृत्य , सिनेमा और टीवी सीरियल , टीवी पर अनगिनत कार्यक्रमों का आनंद लेता है। चलचित्र यानी गतिशील चित्र जिसे देखना , सुनना और समझना आसान होता है। चलचित्र में जो भी दिखाया जाता है वह सभी के मष्तिष्क पर जम जाता है।  चलचित्र का प्रभाव मनुष्य के  सोच पर  भी पड़ता है। चलचित्र के द्वारा विदेशो , अपने देशो की कई अच्छी बुरी  घटनाओ  को फ़िल्मी परदे पर दिखाया जाता  है।

चलचित्र के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाया जा सकता है।  चलचित्र के माध्यम से कई सामाजिक बुरियाँ और कुरीतियां जैसे बाल विवाह , बालमज़दूरी , छुआछूत या जातपात को संवेदनशीलता के साथ दिखाया जाता है।  इससे समाज को सन्देश प्राप्त होता है। दर्शक जब चलचित्रो को देखते है तब   उन्हें काफी ज्ञान मिलता है।  वह जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझ सकते है।

डाक्यूमेंट्री फिल्मों से हर उम्र के व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होता है। चलचित्र के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाती है , जिससे लोगो को काफी कुछ जानने को मिलता है। चलचित्र के माध्यम से व्यापार को विकसित किया जा सकता है।  कई तरह की ज्ञानवर्धक सूचनाएं व्यापार स्तर पर चलचित्र के माध्यम से दी जाती है। चलचिता का सबसे बड़ा लाभ है यह मनुष्य के विभिन्न भावनाओ को उजागर करता है। कई तरह की फिल्में देशभक्ति को जगाती है। उपकार , एक ही रास्ता जैसे फिल्में समाज में उच्च आदर्शो और भावनाओ को विकसित कर सकती है। चलचित्र के कुछ नुकसान भी है जैसे बच्चे चलचित्र के ज़्यादा आदी हो जाते है।  उनका मन पढ़ाई में कम फिल्मों में ज़्यादा रहता है।  इससे उनकी  एकाग्रता में असर पड़ता है।  बच्चे माता पिता से झूठ बोलकर अपने मित्रो के साथ फिल्में देखने चले जाते है।  यह सही नहीं है।  ज़रूरत से अधिक कोई भी आदत अच्छी नहीं होती है।

चलचित्र अतिरिक्त देखने से बच्चो पर बुरा असर पड़ता है। हर किसी के फायदे और नुकसान होते है, चलचित्र के भी है । कुछ लोग बिना सोच समझकर चलचित्र में दिखाई जाने वाली गलत चीज़ो का अनुकरण करते है। कभी कभी चलचित्र में मार धार , गंदे और अश्लील चीज़ें प्रस्तुत की जाती है। इससे समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है। चलचित्र का प्रभाव सीधा मनुष्य की सोच पर पड़ता है।  इसलिए फिल्में  बनाने वालो को सोच समझ कर फिल्में बनानी चाहिए।

 फिल्मो में आयेदिन अपराधों को इतना बढ़ा चढ़ाकर दिखाने से बच्चो पर बुरा प्रभाव पड़ता है। चोरी , डैकती , मार पीठ  , अपहरण जैसे चीज़ें देखते है और उनको अपने जीवन में अपनाने की चेष्टा करते है।  असली जिन्दगी से फिल्में जुड़ी हुयी  होती है।  फिल्मो में जो हर चीज़ दिखाई जाए वह सच नहीं होता है , वह केवल दर्शको के मनोरंजन के लिए बनाया जाता है।

अतिरिक्त चलचित्र देखने की वजह से आँखों पर बुरा असर पड़ता है। मनुष्य ज़्यादा फिल्में इत्यादि देखने की वजह से आलसी बन जाते है। चलचित्र का निर्माण राष्ट्रिय , ऐतिहासिक , सांस्कृतिक , सामाजिक और धार्मिक स्तर पर होना चाहिए।

निष्कर्ष

हर किसी व्यक्ति को मनोरंजन की ज़रूरत है।  अपने व्यस्त जीवन के तनाव को दूर करने के लिए वह चलचित्र देखते है। चलचित्र विज्ञान की अनमोल  भेंट है। चलचित्र का उपयोग सही दिशा यानी राष्ट्रहित के लिए किया जाए तो यह वरदान से कम नहीं है। चलचित्र का सदुपयोग ममुष्य को करना चाहिए ताकि वाने वाले पीढ़ी अपने नैतिक मूल्यों को ना भूले और उनकी सोच प्रभावित ना हो।  चलचित्र एक ऐसा माध्यम है जो मनुष्य के दिलो दिमाग पर अमिट प्रभाव छोड़ता है। यह केवल हम पर निर्भर करता है कि हम चलचित्र का इस्तेमाल सकारात्मक रूप से करे या नकारात्मक रूप से। चलचित्र के मामले में सेंसर बोर्ड  को ठोस कदम उठाने होंगे ताकि चलचित्र जनता के लिए प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक ही साबित हो।

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