खनिज संसाधन

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एक खनिज  प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पदार्थ है, जो रासायनिक सूत्र द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।  आमतौर पर ठोस  और इसमें एक क्रिस्टल संरचना होती है। इस तरीके के रासनायिक खनिज  संसाधनों को केमिकल फार्मूला द्वारा दर्शाया जाता है।

खनिज संसाधन सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण भौतिक आधार हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार  मानव जाति द्वारा उपयोग की जाने वाली 95% से अधिक ऊर्जा, 80% औद्योगिक कच्चे माल और कृषि उत्पादन के लिए 70% कच्चे माल , खनिज संसाधनों से ही प्राप्त होता है।  दो हजार से अधिक खनिजों की पहचान अब तक की गई है और इनमें से ज़्यादातर इनऑर्गेनिक तत्व  हैं, जो तत्वों  के विभिन्न संयोजन यानी एलिमेंट्स को मिलाकर  बनते हैं।  पृथ्वी के अंदर  एक छोटे अनुपात में कार्बनिक यानी आर्गेनिक  पदार्थ होते हैं, जिसमें सोना, चांदी, हीरा और सल्फर जैसे तत्व शामिल होते हैं।

भारत के कुछ राज्यों में बहुत मात्रा में खनिज संसाधन पाए जाते है। पश्चिम बंगाल और उड़ीसा  जैसे राज्यों में बड़े मात्रा में लोहा और कोयला पाया जाता है। स्वतंत्रता के पश्चात इन खानो में लगातार काम करने वाले लोगो की दशा में सुधार लाना चाहिए।  पहले की तुलना में यह खनिजों के भण्डार कम हो गए है।  कोयला असम , मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़  जैसे राज्यों में भी पाए जाते है। लेकिन इन राज्यों में कोयला थोड़ा कम मिलता है।

खनिज संसाधनों को दो मुख्य भागो  में विभाजित किया गया है :

धातु खनिज संसाधन यानी मेटालिक मिनरल रिसोर्स  और गैर-धातु खनिज संसाधन यानी नॉन मैटेलिक रिसोर्सेज |

धातु खनिज की सामान्य  विशेषताएँ

  • धातु खनिज में हमेशा चमक होती है।
  • धातु का संभावित स्रोत जिसे खनन के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
  • उनकी रासायनिक संरचना में धातुएं शामिल हैं।

धात्विक खनिजों का वर्गीकरण

लौह धातु खनिज यानी फेरस मैटेलिक मिनरल जैसे मैगनीज, क्रोमाइट आदि।

अधात्विक  खनिज यानी नॉन फेरस मिनरल जैसे सिल्वर,  गोल्ड ,चूना पत्थर , अभ्रक , जिप्सम , हीरा इत्यादि।

कोहिनूर हीरा गोलकुण्ड की खान से मिलता है। हीरा कार्बन का सबसे शुद्ध रूप है। हीरे जैसे खनिज को तोड़ना आसान नहीं होता है। हीरा मध्य प्रदेश में भी पाया जाता है।

लौह खनिज गया कहा जाता है, जिन खनिजों में लोहा होता है |लौह खनिजों का उदाहरण क्रोमाइट्स, लौह अयस्क और मैंगनीज इत्यादि  है। जिन खनिजों में लोहा मौजूद  नहीं होता है, उन्हें  नॉन फेरस  खनिज कहा जाता है। गैर-खनिज खनिजों के उदाहरण सीसा, चांदी, सोना और तांबा है। धात्विक खनिजों में मैंगनीज , ताम्बा , सोना , चांदी , एल्युमीनियम , यूरेनियम , निकल  जैसे खनिज पाए जाते  है। देश में कई प्रकार के खनिज पाए जाते है , मगर लोग सोना और चांदी ज़्यादा पसंद करते है। चांदी जैसे खनिज का आयात  देश को करवाना पड़ता है।

देश ने लोहे के उत्पादन में काफी वृद्धि की है। लोहे का अच्छा भाग दूसरे देशो में निर्यात किया जाता है। मैंगनीज़ के भण्डार मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र , गुजरात , कर्नाटक ,  आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में पाया जाता है।

भारत में मैंगनीज भारी मात्रा में पाया जाता है। ताम्बे का उत्पादन देश में कुछ ख़ास नहीं होता है।  यह हमे बाहर के देशो से मंगवाना पड़ता है। सिक्किम , झारखंड  जैसे क्षेत्रों में ताम्बा पाया जाता है। सोने की खाने मैसूर में है। यहाँ भी सोने के उत्पादन में गिरावट देखी जा रही है।

एल्युमीनियम बॉक्साइट से प्राप्त किया जाता है।  इसका इस्तेमाल एल्युमीनियम सीमेंट बनाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मकानों और पुलों को बनाने के लिए भी किया जाता है। भारत में लगभग ३२०० लाख टन  बॉक्साइट के भण्डार उपलब्ध है। क्रोमियम का इस्तेमाल इस्पात बनाने और कई तरह के रसायन बनाने के लिए किया जाता है।

नॉन मेटालिक  खनिज संसाधन  

 इस प्रकार के खनिज में कोई चमक नहीं होती है।

उनकी रासायनिक संरचना में निकालने योग्य धातुएं नहीं होती है।

कोयला का उपयोग कई उद्योगों में किया जाता है। इसमें सीमेंट , इस्पात , इत्यादि शामिल है । साल १९७३ में कोल इंडिया लिमिटेड का गठन किया गया था । कोयले का उत्पादन भी ज़्यादा हो गया और उपभोक्ताओं तक इसे पहुंचाने के लिए रेल का इस्तेमाल किया जाने लगा। अभी देश में अच्छे गुणवत्ता यानी कोयले  की क्वालिटी   में कमी आयी है। देश के कई कोयले के खानो में कोयले का संग्रह कम हो गया है। अब अच्छे गुणवत्ता  वाले कोयले के उपयोग पर प्रतिबन्ध लगाया जा रहा है। भारत में खनिज तेल का संग्रह नौ सौ लाख टन है। अभी भी देश में खनिज तेल के बढ़ने के कयास लगाए जा रहे है। देश की बढ़ती हुयी जनसंख्या की वजह से खनिज तेल का उपयोग अधिक मात्रा में हो रहा है। हमे इस चीज़ का तोड़ निकालना होगा। खनिज तेल के उत्पादन को जितना बढ़ाएंगे उतना हमे बाहर से मंगवाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

अभ्रक का इस्तेमाल आभूषण और विभिन्न वस्तुओं के निर्माण के लिए किया जाता है। यह राजस्थान , आंध्र  प्रदेश , बिहार और झारखण्ड जैसे क्षेत्रों में पाए जाते है। इसका निर्यात भी बाहर के कई यूरोपियन देशो में किया जाता है। इस खनिज से  देश को काफी मुनाफा होता है। चूना पत्थर यानी कैल्शियम कार्बोनेट ( लाइमस्टोन )का उपयोग भी सीमेंट , लोहा और अन्य रासायनिक पदार्थो के निर्माण में किया जाता है। जिप्सम मुख्य रूप से जम्मू -कश्मीर और गुजरात इत्यादि राज्यों में पाया जाता है। जिप्सम की मांग उर्वरक और सीमेंट उद्योगों में ज़्यादा है।

खनिज संसाधन को भूमि से उतना ही निकालना चाहिए , जितना ज़रूरत हो। जिस प्रकार मनुष्य औद्योगिक विकास की ओर भाग रहा है , वहां खनिज संसाधनों का उपयोग अधिक बढ़ गया है।  इस पर रोक लगाना ज़रूरत है , वरना आगे चलकर औद्योगिक उन्नति खतरे में पड़ जाएगी। खनिज संसाधनों का सुचारु रूप से पता लगाना ज़रूरी है। खनिजों को खुले जगह पर नहीं छोड़ना चाहिए। खनिज संसाधनों को अच्छे से रखने के लिए सुरक्षित भण्डारो का उपयोग करना चाहिए। जिन खनिजों के भण्डारो में गिरावट आयी है ,उन खनिजों के विकल्पों का तलाश करना अनिवार्य है। इससे खनिजों के संरक्षण  में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

खनिज संसाधन प्राकृतिक संसाधन है।  इसका इस्तेमाल सोच समझकर करना आवश्यक है। अभी कई वर्षो से कई खनिजों के उत्पादन में गिरावट देखी गयी है। अगर इसी तरह से संसाधनों को खनन द्वारा अधिक निकला गया , तो बाद में इसका मिलना , नामुमकिन हो जाएगा। खनिज संरक्षण के कई तरह के उपाय किये जा रहे है। प्राकृतिक खनिज संसाधनों का संरक्षण करना इंसानो की जिम्मेदारी है।

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