चंद्रशेखर आजाद पर निबंध

दोस्तों, हमारे भारत देश की आजादी के लिए कई महान सेनानियों ने मिलकर संघर्ष किया है। जिनका संघर्ष हम कभी भी नहीं भूल सकते हैं। भारत के इन्हीं महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे चंद्रशेखर आजाद। चंद्रशेखर आजाद ने अपने संघर्षों और बलिदान से भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अतः हम आज अपने आर्टिकल की जा रही है आपको चंद्रशेखर आजाद पर निबंध प्रस्तुत कर रहे हैं। यह एक आसान भाषा में लिखा गया सरल निबंध है जिसे विद्यार्थी आसानी से समझ सकते हैं। आपको इस निबंध के जरिए चंद्रशेखर के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलेगा और साथ ही यह आपके विद्यालय से जुड़े निबंध में भी सहायता करेगा।

तो आइए जानते हैं, चंद्रशेखर आजाद पर निबंध…..

प्रस्तावना

हमारे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अथक संघर्ष किया है। भारत के स्वतंत्रता के सबसे महान शहीदों में से एक है चंद्रशेखर आजाद। जो भारत माता के सच्चे सपूत कहलाते हैं। चंद्रशेखर आजाद की बहादुरी हमेशा भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में याद की जाती है। चंद्रशेखर आजाद का जीवन क्रांतिकारी गतिविधियों से भरा रहा है। आज दुनिया भर में चंद्रशेखर आजाद का नाम एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाता है।

चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय

भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था। इनका जन्म मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में हुआ था। यह एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे और भील आदिवासी बच्चों के साथ पले बड़े थे। यह बचपन से ही काफी फुर्तीले थे। इनकी माता इन्हें संस्कृत का विद्वान बनाना चाहती थी, जिसके लिए इन्हें काशी विद्यापीठ भेजा गया। लेकिन वहां राष्ट्रवाद से परिचित होकर यह एक स्वतंत्रता सेनानी बन गए।

चंद्रशेखर का तिवारी से परिवर्तन आजाद तक

1919 में अमृतसर में जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था। इस घटना ने दिखाया कि कैसे ब्रिटिश अधिकारियों ने बुनियादी मानवाधिकारों की खुले तौर पर अनदेखी की। उन्होंने निर्दोष और निहत्थे नागरिकों के एक समूह पर हिंसा का इस्तेमाल किया। इस घटना से बहुत परेशान होकर चंद्रशेखर महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल हो गए। गांधी जी के असहयोग आंदोलन की घोषणा की। इसने राष्ट्रवाद की पहली लहर को जन्म दिया।

चंद्रशेखर उन किशोरों में से एक थे जिन्होंने इन विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभाई थी। इनमें से एक घटना में जब 16 साल के चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया तो मजिस्ट्रेट ने उससे उसका नाम पूछा। उन्होंने अपना परिचय आजाद भारत के पुत्र आजाद के रूप में दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता का नाम स्वतंत्र (स्वतंत्रता) था और उनका घर जेल की कोठरी थी। क्रोधित मजिस्ट्रेट ने उसे उसके अपमानजनक व्यवहार के लिए सजा के रूप में पंद्रह चाबुक मारने की सजा सुनाई। चंद्रशेखर को पूर्ण उदासीनता के साथ सजा का सामना करना पड़ा।

चंद्रशेखर आजाद की बहादुर मौत

चंद्रशेखर आजाद ब्रिटिश राज के लिए एक आतंक साबित हुए थे। ब्रिटिश अधिकारी आजाद को हर तरह से पकड़ना चाहते थे। उन्होंने आजाद को पकड़ के लाने पर एक बड़ी राशि का इनाम देने की भी घोषणा की। इस घोषणा के चलते एक मुखबिर ने आजाद का ठिकाना लीक कर दिया। 27 फरवरी 1931 को आजाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपने दोस्तों से मिलने जा रहे थे। पुलिस पहले से ही पार्क में मौजूद थी और आजाद को स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।

अपने दोस्तों के लिए सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था के लिए, आज़ाद ने अधिकारियों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। जिस दिन उन्होंने अपना नाम बदलकर आजाद कर लिया था, उसी दिन उन्होंने आजादी की कसम खा ली थी। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा जीवित न पकड़कर अपनी प्रतिज्ञा को निभाया।

उपसंहार

भारत के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद में समाजवादी क्रांति का आवाहन किया। उन्होंने संकल्प लिया था कि वह ना तो ब्रिटिश सरकार द्वारा पकड़े जाएंगे और ना ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी। इसी संकल्प को पूरा करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में स्वयं को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी।

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