शूटिंग या निशानेबाजी पर निबंध

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आपने अपनी सामान्य ज्ञान पुस्तकों, न्यूज चैनलों तथा अखबारों में छपने वाले लेखों में “अभिनव बिंद्रा” नाम के भारतीय खिलाड़ी का नाम अक्सर पढ़ा होगा। अभिनव बिंद्रा वह खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक 2008 में आयोजित होने वाले कई खेलों में से एक शूटिंग या निशानेबाजी नाम के खेल में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया था। जिसके बाद से भारत में इस खेल का क्रेज बढ़ता चला गया।

प्राचीन काल में राजा महाराजाओं द्वारा तीरंदाजी का शौक रखा जाता है। तीरंदाजी में ही निशाना लगाया जाता है। लेकिन उस समय यह निशानेबाजी किसी प्रकार की प्रतिस्पर्द्धा में परिवर्तित नहीं थी। उस समय राजाओं के लिए यह एक शौक मात्र था। इसके अतिरिक्त कुछ समय बाद निशानेबाजी का प्रयोग शिकार के लिए किया जाने लगा।

वर्तमान में निशानेबाजी का स्तर बेहद बढ़ चुका है। निशानेबाजी को शूटिंग का रूप देकर ओलंपिक खेलों में भी शामिल किया जा चुका है। ओलंपिक खेलों में आयोजित किए जाने वाले शूटिंग प्रतियोगिताओं में विभिन्न देश के प्रतिभागी हिस्सा लेकर अपने देश की ओर से बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

आज हम आपके लिए इस लेख के माध्यम से शूटिंग या निशानेबाजी खेल विषय पर निबंध लेकर प्रस्तुत हुए हैं। इस निबंध के माध्यम से आपको शूटिंग या निशानेबाजी खेल के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त आप इस निबंध का प्रयोग अपने परीक्षाओं में आने वाले खेल संबंधित विषयों पर निबंध भी लिख सकते हैं।

शूटिंग या निशानेबाजी खेल पर निबंध

प्रस्तावना: शूटिंग अथवा निशानेबाजी खेल प्रतिस्पर्द्धाओं में से एक है। यह खेल प्राचीन काल से वर्तमान तक चलता जा रहा है। इस खेल को प्रति बच्चों के साथ साथ हर उम्र का व्यक्ति पसंद करता है। इस खेल की लोकप्रियता के कारण ही आज यह खेल विभिन्न स्तरों पर खेला जाता है। इस खेल को खेलने के लिए कुशल प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ती है। इसके बाद आप अपनी शूटिंग की प्रतिभा को निखार सकेंगे। तत्पश्चात् आप ओलंपिक जैसे खेलों में अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

इतिहास: 1850-1917 में जर्मन जातीय समुदाय ने विशेष रूप से मिडवस्टर्न राज्यों में एथलेटिक क्लब तथा शूटिंग क्लब स्थापित किए गए। 1860 के दशक में राइफलों के ज्ञान ने ट्रैप शूटिंग को अधिक लोकप्रिय बना दिया। परंतु खराब निशानेबाजी से चिंतित होकर वैज्ञानिक आधार पर अमेरिका के अनुभवी अधिकारी कर्नल विलियम सी चर्च तथा जनरल जार्ज विगेंट ने निशानेबाजी को बढ़ावा देने के लिए 1871 में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ अमेरिका का गठन किया।


इसके बाद 1903 में एनआरए कांग्रेस ने सभी प्रमुख कॉलेज, विश्वविद्यालयों, सैन्य अकादमियों में राइफल क्लब स्थापित करना शुरू कर दिया। जिसमें 1906 में युवा कार्यक्रम पूरे जोरों पर था। 200 से अधिक युवा लड़कों ने राष्ट्रीय मैचों में भाग लिया। अब आधुनिक समय में एक मिलियन से भी अधिक युवा दी बॉय स्काउट्स ऑफ अमेरिका, 4- एच, एनसीएए, यूएस जेसीजे, दी अमरीकन लिजन इत्यादि कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।


1896 में ओलंपिक खेलों में पांच शूटिंग स्पर्धाओं को शामिल करने का मौका मिला। इसके आगे बात करे तो 2004 के ओलंपिक खेलों में तीन प्रकार के शूटिंग विषयों को दिखाया गया – राइफल, पिस्टल, शाटगन। भारत में शूटिंग तथा निशानेबाजी को बढ़ावा देने के लिए नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की स्थापना 1951 में की गई।

शूटिंग खेल का आयोजन

राइफल शूटिंग, पिस्तौल शूटिंग, शॉटगन

राइफल शूटिंग: राइफल एक सिंगल-लोडेड गन है। इस गन का कैलिबर 5.6 मिलीमीटर (गन की बैरल का अंदरूनी व्यास) होता है और यह गन राइफल से जुड़े हर इवेंट में प्रयोग होती है।

• शूटिंग के इवेंट दो भागों में विभाजित होते हैं – 50 मीटर राइफल तथा 10 मीटर एयर राइफल।
• 50 मीटर एयर राइफल में खिलाड़ी नीलिंग, प्रोन, स्टैंडिंग पोजिशन में निशाना साधता है।
• 10 मीटर एयर राइफल में खिलाड़ी कुल 60 शॉट लेता है।
• हर खिलाड़ी को 2 घंटे 45 मिनट में 40 शॉट लगाने होते हैं।
• खिलाड़ियों में से मात्र 8 खिलाड़ी आगे बढ़ते है तथा मेडल के लिए दोबारा खेलते हैं।
• पुरुष तथा महिलाओं के पृथक प्रतियोगिता होने के बाद मिक्स टीम का भी मुकाबला होता है।
• क्वालिफिकेशन राउंड में प्रत्येक टीम के खिलाड़ी को 50 मिनट दिए जाते हैं जिसमें 40 शॉट खेले जाते हैं।
• इसके बाद टॉप पांच टीम फाइनल राउंड का हिस्सा बनती हैं।

पिस्तौल शूटिंग: 4.5 मिलीमीटर कैलिबर की पिस्टल गन का प्रयोग 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में और 5.6 मिलीमीटर कैलिबर की पिस्टल गन का प्रयोग 25 मीटर इवेंट में किया जाता है।

• पिस्तौल शूटिंग भी तीन भागों में विभाजित है _ 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल, 25 मीटर पिस्टल तथा 10 मीटर एयर पिस्टल।
• 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल केवल पुरुषों के मध्य खेला जाता है। जिसमें हर खिलाड़ी को 30-30 शॉट खेलने होते हैं।
• 25 मीटर पिस्टल में केवल महिलाओं को भागीदारी दी जाती है।
• 10 मीटर एयर पिस्टल के नियम 10 मीटर एयर राइफल की तरह ही होते हैं।

शॉटगन:

• शॉटगन में दो इवेंट स्कीट और ट्रैप में विभाजित होता है।
• इन दोनो इवेंट में पुरुष तथा महिलाओं की भागीदारी होती है। ट्रैप में दोनों टीम की भांति शामिल होते हैं।

शूटिंग खेल के नियम:-

• शूटिंग के दौरान आपका ध्यान लक्ष्य की ओर केंद्रित होना आवश्यक है।
• अपनी शूटिंग गन में उचित बुलेट का इस्तेमाल करें।
• आप शूटिंग में जिस गन का प्रयोग कर रहे हैं आपको उसके विषय में पूरी जानकारी अवश्य होनी चाहिए।
• शूटिंग के दौरान अपनी आंख तथा कानों की सूरक्षा के लिए सुरक्षा गार्ड पहनना नहीं भूलना चाहिए।
• शूटिंग के दौरान खिलाड़ी जिस स्थान पर खड़े होकर निशाना लगाते हैं उस स्थान को शूटिंग की भाषा में स्टेशन कहा जाता है।
• निशानेबाजी के खेल परिसर को रेंज का नाम दिया जाता है।
• शूटिंग के समय खिलाड़ी को जैकेट भी पहननी चाहिए। यह जैकेट खिलाड़ी को निशाना लगाते समय ग्रिप बनाने में मदद करता है।

निष्कर्ष

शूूटिंग या निशानेबाजी का खेल समय के साथ साथ आगे बढ़ता जा रहा है। बच्चों के लिए यह खेल बेहद रोमांचक है। हालांकि शूटिंग क्लब तथा खेल से संबंधित प्रशिक्षण लेने के लिए अधिक धन की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन यदि आप इस खेल में अपनी कुशलता की बढ़ाते है। तो यह आपके भविष्य के लिए बेहतर मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यही कारण है कि भारत में भी शूटिंग स्पोर्ट के जनक “श्री जी.वी. मावलंकर” ने शूटिंग खेल को बढ़ावा देने का सदैव प्रयास किया।

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