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गाय पर निंबध

गाय पर निंबध
गौ माता पर निबंध।
Hindi Essay on Cow .

प्रस्तावना:- भारत देश अनेक रीती -रिवाजों और धर्मों को मानने वाला देश है यहाँ पर हर धर्म का मानव सामान है फिर भी भारत देश अपनी पौराणिक संस्कृति और परंपराओं को लेकर आज भी पूरे जग में प्रसिद्ध है। भारत का मुख्य व्यवसाय पशुपालन और खेती है। माना जाता है जो आदि काल से चला आ रहा है इसीलिए पशु पालन के व्यवसाय से जुड़ा हुआ प्राणी एक गाय भी है इसकी उपयोगिता और विशेषता के बारे में आज हम विस्तार से चर्चा करेंगे

भारत देश के आर्थिक व्यवस्था का मुख्य आधार कृषि उत्पादन और पशुपालन है जिसमे गाय का बहुत ही महत्व है गाय को अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी समान माना गया है पशुपालन की उद्योग में गाय का अधिकतम महत्व माना गया है और प्राणियों की तुलना में गाय को प्राणी के रूप में ही नहीं बल्कि माता के रूप में पूजा जाता है जो उसका महत्व अपने आप में ही दर्शाता है।

भारत देश अन्य देशों की तुलना गाय को एक माता के रूप में मानकर उसकी पूजा करता है। गौ माता की आपसे ही नहीं पुराणों के समय से पूजा होती आ रही है। चाहे जमाना कितना ही क्यों ना बदल गया हो मगर गाय आज भी उतनी ही पूजनीय और महत्वपूर्ण है। आज भी उसकी उपयोगिता कम नहीं हुई है।

धार्मिक त्योहारों पर, रीति-रिवाजों से कई वर्गों में आज भी पूजा की जाती है भगवान कृष्णा भी गाय के साथ ही रह कर बडे हुए है और गाय को पालने का कार्य भी करते थे। इसलिए गाय को गोपाल के नाम से भी संबोधित किया जाता है, और कहा जाता है कि गौ माता के अंदर 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है। इसी धार्मिक मान्यताओं के कारण भारत देश में गाय का बहुत ही महत्व है।

हर देश में अलग-अलग गाय देखने को मिलती है जिसका कद, आकार, रंग अलग-अलग होता है। भारत जैसे देश में गाय ज्यादातर नीचे कद की देखने को मिलती है उसके साथ ही उसकी रंग विविधता भी देखने को मिलती है ज्यादातर गाय काली, सफेद या कई बार काबर चितरे रंग की भी देखने को मिलती है।

गाय का आकार छोटा होता है और वह दो सिंग, चार पैर, एक लंबी पूछ जिसके बालों का एक गुच्छा होता है गाय के चार आँचल भी होते है कई देशों में बिना सिंग वाली गाय भी पाई जाती है गाय बहुत ही उपयोगी प्राणी है। गाय का दूध बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी है वह मां के दूध की तरह पचने में हल्का होता है। बच्चों के साथ-साथ रोगियों के लिए भी डॉक्टर गाय के दूध को पीने की सलाह देते हैं। जो स्वास्थ्यवर्धक और दिमाग को तेज कर, याद शक्ति बढ़ाने के लिए भी गाय के दूध का उपयोग किया जाता है।

गाय के दूध के उपयोग के साथ-साथ उसका गोबर भी ईधन और खेत पैदास में खाद्य के रूप में उपयोग किया जाता है। गाय के गोबर से पुराने समय में घर को लिखकर सजाने के काम में भी आता था। गाय के गोमूत्र से कई रोगों को मिटाने के लिए औषधियों के रूप में भी उपयोग किया जाता है

गाय एक मादा प्राणी है जो 9 या 10 महीने के बाद बछड़े को जन्म देती है। गाय बड़ी होकर दूध देती है, और बैल बड़ा होकर बैलगाड़ी या खेत जोतने के काम में किसान को मदद करता है। किसान के लिए बैल एक अपनी संतान की तरह होता है। किसान को अपना वीर बहुत प्यारा होता है क्योंकि खेती के काम का पूरा आधार बैल पर ही होता है।

गाय अपने बछड़े को चलना नहीं सिखाती क्योंकि वह जन्म के कुछ ही देर के बाद अपने आप ही चलने लगता है इसलिए भी गाय का दूध पीने से स्फ्रुती आ जाती है ऐसा माना जाता है। भैस का बछड़ा दूध पीकर पड़ा रहता है, जबकि गाय का बछड़ा चलता फिरता रहता है। इसलिए भी भैंस के दूध से ज्यादा गाय के दूध को पीना उपयोगी माना गया है।

गाय को देश की समृद्धि के प्रतीक के रूप में भी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस देश में ज्यादा गाय होती है। वह देश ज्यादा समृद्ध माना जाता था। इसलिए युद्ध के दौरान धन- दौलत के साथ-साथ गाय को भी अपने साथ ले जाते थे जिससे वह देश बहुत ही समृद्ध माना जाता था। आज के बदलते समय के साथ-साथ गाय का महत्व तो कम नहीं हुआ है मगर आज की स्थिति में उसके पालन-पोषण में बदलाव जरूर आया है।

पहले के समय में पशुपालन को व्यवसाय के रूप में देखा जाता था, गाय की देखभाल  किसान या गोपाला अपनी मां की तरह करता था। उसके रहने की व्यवस्था थी उसके खान-पान का भी विशेष रूप से ध्यान रखा जाता था। गाय ज्यादा ताजी घास, अनाज आदि खाती है।जिसके लिए उसको  खुली जगह पर भी खाने के लिए।

आज के बदलते समय के साथ गाय का महत्व तो कम नहीं हुआ है मगर उसकी स्थिति में आज काफी बदलाव आया है आज किशान पशुपालन के व्यवसाय को छोड़कर शहेर की ओर बढ़ रहा है। जिससे कभी -कभी गाय की स्थिति दयनीय भी होती हुई नजर आ रही है, शहर में रहने से गाय को गांव की तरह अलग से रहने को कोई जगह नहीं मिलती वह कभी-कभी रस्ते पर इधर-उधर भटकती हुई नजर आती है।

शहर में प्लास्टिक की थैली का ज्यादातर उपयोग होता है जो इधर-उधर फेंक देने से खाना समझकर गाय कभी खा लेती है उससे  उसकी मृत्यु भी हो जाती है। भारत के बदलते युग के साथ गाय की स्थिति भी बदल गई है आज गाय को रखने के लिए शहर में गौशाला जैसी संस्थाएं चलाने को मजबूर है जहां ऐसी गाय को रखा जाता है जिनका कोई मालिक नहीं होता है या जिसको गोपाल ने छोड़ दिया हो इधर उधर भटक रही हो ऐसी गायों को आश्रय स्थान दिया जाता है।  संस्था के सहयोग के द्वारा उसकी देखभाल की जाती है उसे समय- समय पर खाना देना और स्वच्छ करने जैसा कार्य किए जाते हैं।

भारत देश में गौ हत्या एक पाप माना जाता है।  फिर भी विदेशों में गाय का मांस खाया जाता है और गाय से बनती हुई बनावट की मांग के कारण गाय की हत्या भी की जाती है गाय की हत्या ना हो इसके लिए भारत सरकार ने नियम और कानून बनाई जिसका उलघ्घन करने से सजा दी जाती है।

उपसंहार:- आज भी भारत देश गाय को एक माँ के रूप में मानता है उसके पालन-पोषण और उसकी रक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा नियम और कानून की व्यवस्था की है जिसके कारण बहु उपयोगी गाय का मूल्य और अस्तित्व बना रहे गाय हमारी गौ माता है और वह हमें बहुत ही उपयोगी पालतू प्राणी है।

#संबंधित:- Hindi Essay, Hindi Paragraph, हिंदी निबंध। 

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