आदर्श विद्यार्थी पर निबंध

आदर्श विद्यार्थी पर निबंध
Essay on ideal student

आदर्श विद्यार्थी वह है जो एक आदर्श राष्ट्र का निर्माण करता है आदर्शता किसी मनुष्य में उपस्थित वह गुण है जो सद्बुद्धि सदचिंतन जैसे संस्कारों को परिलक्षित करती है विद्यालयों में एक छात्र के आदर्शवादी होने का प्रमाण यही है कि वह कितना अनुशासित है उसमें अपने गुरुजनों के प्रति कितना आदर एवं सम्मान है, प्रकृति जब भी जीवन का सृजन करती है तो साथ ही साथ संस्कारों का भी सृजन करती है और संस्कारों की सूची में आदर्शता प्रथम स्थान पर आती है।

जब शिशु विद्यालय जाता है तो उसे विद्यालय के नियमानुसार व्यवहार करना पड़ता है जिसकी वजह से उसके भीतर अनुशासन के बीज का बीजारोपण होता है अनुशासन पहली सीढ़ी है जो एक विद्यार्थी को आदर्श बनाने में सहायक होती है एक आदर्श विद्यार्थी विद्यालय में गुरुजनों का विशेष प्रिय होता है, एकाग्रता, हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना दूसरों के प्रति प्रेमभाव रखना सारे गुण आदर्श विद्यार्थी में ही होते हैं।

किसी भी देश की पहचान उस देश की सभ्यता एवं संस्कृति से होती है और उस सभ्यता एवं संस्कृति को जीवित एक आदर्श नागरिक ही रख सकता है भारत में ऐसे बहुत महान विचारक एवं विद्वान हुए जिन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में ही अपनी आदर्शता का ऐसा परिचय दिया की उनके शिक्षकों द्वारा उनके उज्जवल भविष्य की उद्घोषणा उनके विद्यार्थी जीवन में ही कर दी गई थी।

आदर्शता किस प्रकार एक विद्यार्थी में प्रेम, भाव, त्याग बलिदान के गुणों का विकास करती है इसे में एक छोटी सी कहानी के माध्यम से समझाना चाहूंगी जो कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विद्यार्थी जीवन से जुड़ी हुई है वह जिस विद्यालय में पढ़ते थे वहां उनका एक साथी बहुत ही गरीब था उसके पास विद्यालय की पोशाक तक के पैसे नहीं थे जैसे तैसे करके वह विद्यालय की फीस जमा कर पाता था विद्यालय की पोशाक ना होने की वजह से उसे शिक्षक द्वारा प्रतिदिन डांटा जाता था।

रोज रोज डांट खाने के डर से उसने विद्यालय आना छोड़ दिया उसकी अनुपस्थिति बालक नरेंद्र को बहुत अखरने लगी बालक नरेंद्र दिन-रात यही सोचा करता कि कैसे उस दोस्त की सहायता की जाए जिससे वह अपनी शिक्षा को जारी रख सकें बालक नरेंद्र भी काफी गरीब परिवार से थे तो उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह उसकी सहायता कर सकें उन्होंने एक युक्ति निकाली पैसा इकट्ठा करने कि उन्होंने अपने कुछ मित्रों के साथ मिलकर एक नाटक खेला जिसे देखने के लिए गांव वाले धीरे धीरे
इकट्ठा होने लगे, लोगों को नाटक बहुत पसंद आया और लोगों ने नाटक देखने के बदले कुछ पैसे दिए जिसे इकट्ठा करके बालक नरेंद्र ने अपने मित्र के लिए विद्यालय की नई पोशाक लाई और इस प्रकार उन्होंने अपने मित्र की सहायता की।

उपर्युक्त कहानी से यह तो निर्विरोध रूप से स्पष्ट हो जाता है कि जब भी कोई विद्यार्थी आदर्शता के मार्ग पर चलता है तो प्रेम सद्भावना जैसे गुण अपने आप ही उस में विकसित हो जाते हैं एक आदर्श विद्यार्थी हमेशा से सत्य एवं अहिंसा के मार्ग को अपनाता है एवं उच्च विचारों को ही ग्रहण करता है।

वर्तमान समय में आदर्श विद्यार्थी की परिभाषा बदल गई है आज तो वही आदर्श विद्यार्थी है जो परीक्षा में अव्वल आता है बीते वर्षों में अंग्रेजी भाषा एवं सभ्यता ने हमें ऐसा जकड़ लिया है कि अब हम अपने बच्चों को अंग्रेजी विद्यालयों में पढ़ाने में गर्व का अनुभव होता है, आजकल बच्चों को यह तक नहीं पता है कि मां शारदा कौन है? वंदे मातरम जो पहले विद्यालयों में अनिवार्य रूप से गाया जाता था शायद इतिहास के पन्नों में अब कहीं विलुप्त होता जा रहा है अंत में यही कहना चाहूंगी कि एक आदर्श राष्ट्र का निर्माण आदर्श नागरिकों द्वारा होता है और आदर्श नागरिक बनने के लिए सर्वप्रथम हमें आदर्श विद्यार्थी बनना पड़ेगा और इसकी जिम्मेवारी सिर्फ परिवार की ही नहीं अपितु विद्यालय और समाज की भी है अपने देश के गौरव एवं गरिमा को बनाए रखने के लिए आदर्श विद्यार्थी का होना अत्यंत आवश्यक है।

जागृति अस्थाना -लेखक

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